Loading... Please wait...

विपक्ष बनवा रहा मोदी हवा!

बंगाल में हवा बन रही है और यह नरेंद्र मोदी को जीताने वाली भी हो सकती है। हां, यह मैं लिख रहा हूं! मैं, जो आज भी जमीनी हकीकत में भाजपा की 154 ही सीट मानता हूं। लेकिन अगले दो महीने को ले कर अपने को  खटका है कि मायावती-प्रियंका जहां यूपी में भाजपा की सीटे बढ़वाएंगे वहीं ममता बनर्जी बंगाल में भाजपा की सीटों को दो अंको से पार पहुंचवा देंगी। मतलब तेजस्वी यादव, चंद्रबाबू नायडु, केजरीवाल हों या राहुल गांधी व लेफ्ट, सेकुलर सभी ऐन वक्त वे काम कर रहे हंै, ऐसे तेवर दिखा रहे हैं जिसमें  नरेंद्र मोदी- अमित शाह की बले-बले संभव है। ध्यान रहे मैं लगातार लिख रहा हूं कि नोट करके रखंे कि नरेंद्र मोदी मई में वापिस शपथ लेने के लिए कुछ भी करेंगे। उनके मिशन को अचानक  ममता बनर्जी, राहुल गांधी, लेफ्ट और तेजस्वी सभी आसान बनाते लग रहे हैं। सेकुलर और मीडियाकर्मियों की मूर्खता है जो लिख रहे हंै कि ममता ने धरने पर बैठ कर मोदी-शाह को कार्नर किया। कतई नहीं। अपना मानना है कि ममता बनर्जी अपने पांवों खुद ऐसे कुल्हाड़ी मार रही हैं कि लोकसभा चुनाव बाद उठ भी नहीं पाएंगी। पश्चिम बंगाल में कहीं 2006 वाला माहौल न बन जाए। वह माहौल जिसमें ममता बनर्जी की चुनौती के आगे लेफ्ट का किला रेत महल की तरह ढहा था। हां, जो हालात बन रहे हंै उसमें मैं अभी पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में भाजपा की 9-10 सीटंे मान रहा हूं लेकिन ये 18 भी हो सकती हैं तो 26 भी।

ऐसा बंगाल में हिंदू बनाम मुस्लिम की बन रही हवा से है। जान लंे कि नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल में दोनों सभाएं सुपर हिट थी। योगी आदित्यनाथ का हिंदुओं में वहा क्रेज है। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल हिंदू-बनाम मुस्लिम बन रहा है और यदि ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ा कांग्रेस और लेफ्ट से एलायंस नहीं बनाया, तीनों को जनता के बीच मनोभाव समझ नहीं आया तो तीनों बुरी तरह हारंेगे और भाजपा की ऐसी आंधी बनेगी कि 42 सीटों में से वह कितनी सीटे लेगी, इसका अनुमान ही लगाया जा सकता है। 

उस नाते भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल पकता लग रहा है तो पूर्वोत्तर राज्यों में भी एनआरसी की वजह से भाजपा के पक्ष में माहौल बन रहा है। बंगाल की 42 और पुर्वोत्तर की 29 सीटों में भाजपा-एनडीए अप्रत्याशित जीत पा सकती है। उधर बिहार में तेजस्वी यादव का फॉरवर्ड आरक्षण के खिलाफ बोलना, लालू यादव के अंदाज में बोलना शुरू होना वोट गंवाने वाला है। केजरीवाल ने कह दिया है कि वे सब जगह अपने अलग उम्मीदवार खड़े करंेगे। आंध्रप्रदेश में तेलगू देशम और कांग्रेस आपस में लड़ेंगे तो यूपी में राहुल गांधी- प्रिंयका गाधी ऐसा माहौल बनाएंगे जिससे बसपा-सपा एलायंस के उम्मीदवारों का जीतना मुश्किल होगा और इनकी आपसी लड़ाई में भाजपा 30 सीटों का आंकड़ा पार कर सकती है।  

दरअसल हर क्षत्रप और राहुल गांधी सब मान बैठे हंै कि नरेंद्र मोदी तो हार रहे हंै इसलिए अपनी सीटे ज्यादा बनाओ। फ्रंट फुट पर खड़े हो कर चुनाव लड़ो। मतलब नरेंद्र मोदी को हराने का मकसद नहीं रहा है बल्कि अपनी सीटंे बढ़ाना प्राथमिकता हो गया है। 

ठीक विपरित नरेंद्र मोदी और अमित शाह हर वह काम कर रहे हैं जिसमें विपक्ष बिखरे और विपक्ष का नैरेटिव नहीं बने। हालांकि इसमें भी उसके अधिकांश काम विनाश काले विपरीत बुद्धि वाले लक्षण लिए हुए है। उनका वक्त और भाग्य साथ नहीं दे रहा है लेकिन विपक्ष आपसी फूट से उनके लिए जमीन बनाने के अनचाहे-अनजाने काम कर रहा है। सोचे, यूपी में अर्दध कुंभ, धर्म संसद से, हिंदू एजेंडे वाले बजट से हिंदूओं में हवा नहीं बन रही है लेकिन बंगाल में ममता ने आदित्यनाथ को रोकने या भाजपा की रथ यात्राओं को रोकने से ऐसा नैरेटिव बना दे रही है जिससे मोदी-शाह-योगी की सभाओं में लोग उमड़े हुए हैं। और तय माने मतदान होते-होते ऐसा कई जगह हो सकता है। 

438 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech