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अखाड़े में आज दशा

अगले पच्चीस दिनों में याकि आचार संहिता से पहले मोदी सरकार विपक्ष के खिलाफ चाहे जो भूचाल बनाए, जनता पर असर नहीं होना है। मोदी के जो भक्त, भाजपा के जो वोट हैं वे जस के तस हंै तो विपक्ष के वोट भी पके हुए हैं। या तो मोदी का समर्थन है या विरोध। मैं गुजरात विधानसभा के नतीजों के बाद से लोकसभा 2019 की सीटों का राज्यवार अनुमान तीन दफा दे चुका हूं। इस क़ॉलम में 21 दिसंबर 2017 को मुख्य आईटम की हैडिंग थी-‘2019 में तो भाजपा को लाले!’ फिर जून में यूपी के कैराना उपचुनाव के नतीजे के बाद लिस्ट के साथ हैडिंग थी ‘आज चुनाव तो भाजपा 150!’ तब  लिखा था कि- गुजरात विधानसभा चुनाव नतीजों और कैराना के उपचुनाव नतीजे के बाद बना फर्क तीन कारण लिए हुए है। एक, विपक्ष सचमुच एलायंस बनाने का संकल्प ले बैठा है। दूसरे, हिंदू और खासकर उत्तर प्रदेश का ब्राह्यण, पिछड़ी किसान जातियों में योगी आदित्यनाथ को ले कर खुन्नस हुई है। तीसरा, नरेंद्र मोदी और उनका प्रचार भाजपा के लिए अब लायबिलिटी है न कि पूंजी!’

दिसंबर 2017 में मेरा अनुमान भाजपा को 194 सीटे मिलने का था।  गुजरात विधानसभा और कैराना उपचुनाव के बाद मेरे चार्ट में 150 सीटे थी। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ सहित पांच विधानसभाओं के चुनाव नतीजों के बाद 147 सीटों का था जबकि कांग्रेस को ले कर लिखा था कि यदि आज चुनाव हो तो वह 140 सीटों पर होगी। जून 2018 के कालम में मेरी लिखी लाइने थी- ‘तय माने और मैं फिर वापिस दिसंबर की इस लाइन को दोहरा रहा हूं कि – ‘किसी भी एंगल से सोचे मतलब प्रदेशवार मूड, एंटी इनकंबेसी, मोदी के ग्राफ, लोगों की मनोदशा की कोई भी कसौटी अपनाए 2019 का लोकसभा चुनाव 2014 जैसा कतई नहीं होगा। अगले सवा साल लोगों की मनोदशा और बिगड़नी है।‘

दिसंबर 2017 में में लिखी वह लाइन जून 2018 में में भी जस की तस प्रासंगिक थी तो दिसंबर 2018 में भी। अब 17वीं लोकसभा के आखिरी सत्र के खत्म होने के बाद, चुनाव में जाने से पहले अपने अनुमान में भाजपा की कुछ सीटे बढ़ी है। इसलिए क्योंकि पिछले एक महीने से पश्चिम बंगाल की स्थिति, यूपी में महागंठबंधन से कांग्रेस के अलग रहने, महाराष्ट्र में अंततः भाजपा-शिवसेना के एलायंस के बनने व दिल्ली में कांग्रेस –आप में एलांयस न बनने, कांग्रेस-तेलगू देशम के अलग-अलग होने से जमीनी हकीकत कुछ बदली है। मगर उधर कांग्रेस भी बढ़ी है। वह मध्यप्रदेश, राजस्थान, छतीसगढ में मजबूत हो रही है तो भाजपा इन राज्यों में लावारिस वाली दशा में पहुंची है। सो गौर से लिस्ट को देख विचार करें कि अपनी नजर दीवाल पर लिखे को देख पा रही है या नहीं?  

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