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आचार संहिता है गठबंधन की डेडलाइन

चुनाव की घोषणा होने तक पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर तनातनी चलती रहेगी। आचार संहिता लगने से पहले कोई भी पार्टी तालमेल को अंतिम रूप नहीं देना चाहती है। जिस भी राज्य में भाजपा के विरोध में महागठबंधन बन रहा है वहां किसी न किसी बहाने से मामला अटका है। यहां तक कि कर्नाटक में जहां कांग्रेस और जेडीएस मिल कर सरकार चला रहे हैं वहां भी लोकसभा चुनाव का फार्मूला नहीं तय हो पा रहा है। जेडीएस ने तीन में से एक सीट यानी एक तिहाई सीट लड़ने की घोषणा की है। यानी वह राज्य की 28 में से नौ या दस सीट पर लड़ेगी। पर कांग्रेस ने अभी इसका वादा नहीं किया है। दोनों पार्टियों को लग रहा है कि आचार संहिता से पहले घोषणा की तो केंद्र सरकार, भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों की पहले से चल रही कार्रवाई और तेज हो जाएगी। तभी दोनों पार्टियां ऐसा दिखा रही हैं कि उनके बीच टकराव चल रहा है। 

यहीं हाल उत्तर प्रदेश का है। वहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई है। तभी दोनों पार्टियों के बीच सीट का बंटवारा तय नहीं हो पा रहा है। तालमेल की घोषणा हुए एक महीने से ज्यादा हो गए हैं। कहा जा रहा था कि 15 जनवरी को मायावती के जन्मदिन के रोज दोनों पार्टियां अपनी अपनी सीटों की घोषणा कर देंगी। पर अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है और न इस बारे में बातचीत हो रही है। दोनों पार्टियां ऐसा लग रहा है कि आपस में टकराव दिखा कर मामले को आचार संहिता लागू होने तक टाल रही हैं।

महाराष्ट्र में भी पहले शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस से उनकी बात हो गई है और 40 सीटों पर समझौता हो गया है। फिर उन्होंने कहा कि 44 सीटों पर बात बन गई है। 

इसके बाद अचानक राजू शेट्टी और प्रकाश अंबेडकर के नाराज होने की खबरें आईं। इन दोनों को भी महागठबंधन का हिस्सा होना है। माना जा रहा है कि इनके लिए कांग्रेस और एनसीपी चार सीटें छोड़ेंगे। सो, थोड़े दिन पहले ऐसा लग रहा था कि महाराष्ट्र में सब ठीक हो गया और कांग्रेस, एनसीपी, स्वाभिमानी पक्ष और भारिप मजदूर संघ साथ मिल कर लड़ेंगे वहीं अचानक ऐसा लगने लगा कि सब कुछ बिखरा हुआ है। असल में वहां भी आचार संहिता लागू होने का इंतजार किया जा रहा है। 

बिहार, झारखंड और यहां तक कि तमिलनाडु में विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे नेता इंतजार कर रहे हैं। वे आचार संहिता लागू होने से पहले कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। नेताओं की आपस में मेल मुलाकात हो रही है और गठबंधन के बारे में बात कर रहे हैं। गठबंधन में होने वाली मुश्किलें भी बता रहे हैं पर अंदरखाने ऐसा लग रहा है कि सारी बातें आचार संहित की घोषणा तक रोकी गई हैं। चुनाव की घोषणा होने और आचार संहिता लगते ही सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। 2019 के चुनाव नतीजों के बारे में भी कोई भी सटीक भविष्यवाणी उसी समय लगाई जा सकेगी।  

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