खुफिया तंत्र का एकदम सत्यानाश, तभी बालाकोट पर दस सवाल!

मैं पहले भी लिख चुका हूं। पठानकोट छावनी पर आंतकी हमले के बाद और पुलवामा-बालाकोट के बाद मैंने लिखा था कि भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल फेल हैं। नरेंद्र मोदी को उन्हे बरखास्त करना चाहिए। आज वापिस डोवाल पर इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि इस सप्ताह रायटर्स समाचार एजेंसी ने सिंगापुर से जो रिपोर्ट दी तो उससे दिमाग बुरी तरह झनझनाया है। भला कैसे संभव है यह कि वायु सेना ने, उसके जांबाज पायलटों ने पाकिस्तान की सीमा में घुस कर टारगेट साधा लेकिन अजित डोवाल ने टारगेट की इतनी गलत खुफिया सूचना दी कि न तो बालाकोट में आंतकी मरे और न ही उस टारगेट एरिया की सेटेलाइट इमेज में नुकसान दिखलाई दे रहा है। कितनी भयावह और गद्दारी वाली बात है यह कि सेना का ऑपरेशन ऐसे जाया हो और कोई जवाबदेही न बने। 

इसका सीधा अर्थ है कि अजित डोवाल की कमान में रॉ, आईबी आदि तमाम खुफियाई एजेंसियों, देश के खुफिया तंत्र का भट्ठा बुरी तरह बैठा है। नरेंद्र मोदी- अजित डोवाल की कमान में भारत का खुफिया तंत्र देश के नागरिकों, मेरे-आपके फोन टेप करने, विरोधी नेताओं को फंसाने के लिए उनकी जासूसी, उन्हें बेइमान साबित करने के लिए दुबई से गवाह लाने या आधी रात को सीबीआई के डायरेक्टर को हटवाने या मीडिया को डराने का काम कर रहा है न कि सीमा पार के दुश्मनों की खुफियागिरी। इनके फोकस में नहीं कि सीमा पार से कैसे 300 किलो आरडीएक्स आया या कैसे चीन चुपचाप डोकलाम पठार पर निर्माण की सोच बैठा या बालाकोट में आंतकी कैंप पर वायु सेना से हमला कराना है तो पहले पुख्ता तौर पर ग्राउंड जासूसी या सेटेलाइट आंखों से पुख्ता तौर पर मालूम तो कर लें कि वहां कितने आंतकी हैं? कहां है सचमुच का आंतकी कैंप? 

 जान लें इस तथ्य को कि पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की योजना, उसका खाका सिर्फ नरेंद्र मोदी और अजित डोवाल का बनाया था। इन दोनों ने अपने साथ रॉ, आईबी एजेंसी के प्रमुख, तीनों सेनाध्यक्षों को बैठा कर मतलब कुल सात लोगों ने ब्ल्यूप्रिंट, खाका बनाया। हां, इस हकीकत को सबसे पहले डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एक मार्च को टिवट करके बताया। जाहिर है रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और गृह मंत्री राजनाथ सिंह या विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ऑपरेशन का पता नहीं था जबकि हिसाब से ये तीनों मंत्री विदेशी-अंदरूनी सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े होने के कारण ऑपरेशन के सलाह-मशविरे में रहने चाहिए थे।     

मगर पिछले 55 महीने में अंदरूनी जासूसी और उसमें गहरे राजदार होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा-गृह-विदेश के तीनों मंत्रियों से भी ऊपर की सुपर हैसियत अजित डोवाल की बनाई हुई है। पावर का ऐसा केंद्रीकरण है कि दुनिया में किसी भी देश, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन आदि कहीं भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की कमान में ऐसे पूरा ताना-बाना एक व्यक्ति को सुपुर्द नहीं है, जैसे भारत में अभी डोवाल को है। नरेंद्र मोदी अपने को चौकीदार कहते हैं। मगर सुपर चौकीदार अजित डोवाल हैं, जिनसे कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की कमेटी पूछ नहीं सकती कि सीमा और सीमा पार या कश्मीर में इतनी इंटेलीजेंस नाकामी है तो कैसे? चौकीदार भी सुपर चौकीदार से नहीं पूछ सकता है कि बिना खुफिया सूचना के वायु सेना से ऐसा ऑपरेशन कैसे करा डाला? 

इस सबको सोचते हुए भी अपना दिमाग शांत था। मगर  वैश्विक समाचार एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट ने दिमाग को ऐसा झनझनाया कि सोचने को मजबूर हूं चौकीदार और सुपर चौकीदार ऐसे कैसे?  

रायटर्स की रिपोर्ट का सार है कि भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के जिस प्रशिक्षण शिविर को हवाई हमले में निशाना बनाने का दावा किया है वहां की अप्रैल 2018 में ली गई सेटेलाइट तस्वीर और 4 मार्च 2019 की सेटेलाइट तस्वीर में कोई भी अंतर नहीं दिख रहा है। मतलब अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रायटर्स ने हाई रिजोल्यूशन सेटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा कर भारत सरकार के उन दावों पर सवाल उठाया है, जिसमें उसने उत्तर-पूर्वी पाकिस्तान के बालाकोट इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर को लड़ाकू विमानों से निशाना बनाने और बड़ी संख्या में आतंकियों का मार गिराने की बात कही है। यह सेटेलाइट तस्वीर अमेरिका के सान फ्रांसिस्को स्थित एक निजी सेटेलाइट संचालक प्लैनेट लैब्स इंक ने दी है। इसमें हवाई हमले के छह दिन बाद 4 मार्च को भी मदरसे वाले स्थान पर छह इमारतें दिख रही हैं। अभी तक हाई रिजोल्यूशन सेटेलाइट की कोई भी तस्वीर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं थी। लेकिन प्लैनेट लैब्स इंक ने जो तस्वीरें मुहैया कराई हैं उनमें 72 सेंटीमीटर यानी 28 इंच तक के आकार तक की चीजों को देखा जा सकता है। अप्रैल 2018 में ली गई सेटेलाइट तस्वीर और 4 मार्च की सेटेलाइट तस्वीर में कोई भी अंतर नहीं दिख रहा है। इमारत की छतों में कोई छेद नहीं है, झुलसने वाली दीवारें नहीं हैं और मदरसे के आस-पास टूटे हुए पेड़ और हवाई हमले के अन्य संकेत भी नहीं हैं।

रायटर्स एजेंसी ने बाकायदा इन सेटेलाइट तस्वीरों के संबंध में पहले भारत के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को ईमेल भेजकर उनकी टिप्पणी मांगी मगर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया।

रिपोर्ट अनुसार मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में ईस्ट एशिया नॉन प्रोलिफेरेशन प्रोजेक्ट के निदेशक जेफरी लुइस कहना है कि तस्वीरों से साफ है जिस जगह पर एयर स्ट्राइक करने की बात कही जा रही है वहां जैश के मदरसे की इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। जेफरी लुइस को वेपन्स साइट्स और सिस्टम की सेटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में 15 साल का तजुर्बा है।

जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉन प्रोलिफेरेशन स्टडीज के वरिष्ठ एसोसिएट और सेटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले डेव श्मर्लर ने कहा कि तस्वीर में जो इमारतें दिख रही हैं उन्हें इस तरह की क्षमता वाले हथियार निश्चित तौर पर तबाह कर  देते। वहीं लुइस ने भी उनकी बात का समर्थन किया।

सोचें, ऑपरेशन पर दुनिया की नंबर एक समाचार एजेंसी की सप्रमाण इतनी बड़ी रिपोर्ट और मोदी-डोवाल भारत के झूठे टीवी चैनलों पर सोर्स के हवाल खबरें चलवाते हुए कि हम बताते हैं हकीकत। 

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