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धन्ना सेठों के लूट भागने का चलन

देश के लोग यहीं जानते हैं कि विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी या मेहुल चोकसी ने बड़ा आर्थिक घोटाला किया है और देश छोड़ कर भाग गए हैं। पर इस साल मार्च में खुद भारत सरकार ने संसद के जरिए देश को बताया कि ये चार या पांच नहीं, बल्कि 31 आर्थिक आरोपी हैं, जो पिछले तीन-चार साल में देश छोड़ कर भागे हैं। यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोपों में फंसे एमजे अकबर ने बतौर विदेश राज्यमंत्री यह आंकड़ा संसद में पेश किया था।

यह हैरानी की बात नहीं है कि भागे हुए कारोबारियों में ज्यादातर गुजरात के हैं। एक ही परिवार के चार लोग – मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, निशल मोदी और अमी नीरव मोदी बैंकों को करीब 14 हजार करोड़ रुपए का चूना लगा कर फरार हैं। ये चारों गुजरात के हैं और रोचक तथ्य यह है कि फरार होने से पहले आखिरी बार सार्वजनिक रूप से मेहुल चोकसी और नीरव मोदी दोनों प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी के साथ थे। बहरहाल, दूसरा भगोड़ा परिवार संदेशरा का है। चेतन जयंतीलाल संदेशरा, दिप्ती चेतन संदेशरा और नितिन जयंतीलाल संदेशरा भी हजारों करोड़ रुपए का चूना लगा कर विदेश फरार हो गए है। ये तीनों भी गुजरात के रहने वाले हैं। इनके अलावा विजय कुमार रेवा भाई पटेल, सुनील रमेश रूपाणी, जतीन मेहता, सभ्य सेठ, नीलेश पारिख, उमेश पारिख, हेमंत गांधी, ईश्वर भाई भट आदि भी फरारों की सूची में हैं। 

इस मामले में रोचक तथ्य यह है कि मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के बारे में कई स्रोत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यालय तक शिकायत पहुंची थी। सो, पिछले दिनों एक साप्ताहिक पत्रिका ने सूचना के अधिकार कानून के तहत एक अर्जी लगाई और जानना चाहा कि क्या प्रधानंमत्री कार्यालय ने शिकायतों के आधार पर 2017 में गृह मंत्रालय से इस बारे में पूछताछ की थी और यह जानना चाहा था कि क्या चोकसी और नीरव मोदी के खिलाफ कोई जांच लंबित है या कोई कार्रवाई हुई है? पर इस पीएमओ ने इस सीधे सादे सवाल का जवाब नहीं दिया। गोलमोल बात कह कर अरजी ठुकरा दी गई। पत्रिका ने दोबारा यहीं सवाल पूछा तब भी उसे जवाब नहीं दिया गया। मीडिया में यह खबर कई तरह से आ चुकी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय तक चोकसी की शिकायत पहुंची थी अब अगर पीएमओ ने इतनी शिकायतों के बावजूद कोई खोजबीन नहीं की थी तो इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। 

एक कमाल की बात यह भी है कि आईएल एंड एफएस का भट्ठा बैठने की चर्चा हो रही है पर इसके चेयरमैन रहे रवि पार्थसारथी की चर्चा मीडिया से गायब है। पार्थसारथी लंदन में बैठे हैं और सरकार को इसकी परवाह नहीं दिख रही है। 2013-14 में इस कंपनी के ऊपर करीब 49 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था, जो 2017-18 में बढ़ कर 91 हजार करोड़ हो गया। इस अवधि में बोर्ड के सारे सदस्य मनमाने तरीके से अपनी सेलरी बढ़ाते रहे। पार्थसारथी ने एक साल में अपना वेतन डेढ़ गुना बढ़ाया। जिस समय उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से कंपनी छोड़ तब उनका वेतन 23 करोड़ रुपए सालाना का था यानी दो करोड़ रुपए महीना। यह वेतन देश के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी के 18 करोड़ रुपए के वेतन से पांच करोड़ रुपए ज्यादा था। 

बहरहाल, पार्थसारथी की कमान में आईएल एंड एफएस का भट्ठा बैठा है पर उनसे कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा है। वे लंदन में बैठे हैं और यहां सरकार स्टेट बैंक से पैसा लगवा कर आईएल एंड एफएस को बचाने में जुटी है। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि चौकीदार के बैठे होने के और कथित विकास के बावजूद भारत सरकार का शैडो बैंक माने जाने वाले आईएल एंड एफएस में इतनी गड़बड़ी हुई, उसका कर्ज दोगुना हो गया और कंपनी कर्ज की किस्तें चुकाने में डिफॉल्ट करने लगी?

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