सारी दुनिया पंचायत में शामिल हुई!

जब कूटनीतिक जीत हार की बात हो रही है तो यह भी देखना चाहिए कि दीर्घावधि के हिसाब से कौन अपने मकसद में कामयाब रहा? पाकिस्तान का लंबे समय से यह मकसद रहा है कि भारत और पाकिस्तान के मसले में वह किसी तीसरे पक्ष को शामिल करे। कश्मीर समस्या सुलझाने के लिए भी वह तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के पक्ष में रहा है पर भारत की वजह से कभी भी वह इस मकसद में कामयाब नहीं हो पाया। जब भी किसी तीसरे पक्ष ने कश्मीर समस्या के मामले में या भारत और पाकिस्तान के दोपक्षीय मसलों में दखल देने का प्रयास किया तो भारत ने दो टूक अंदाज में उसे मना कर दिया। पर इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इस बार सारी दुनिया को भारत और पाकिस्तान के मामले में पंचायत करने का मौका मिला है। संयुक्त राष्ट्र संघ सहित अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और यहां तक कि सऊदी अरब ने भी इस मामले में पंचायत की। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भारत आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ कर हवाईअड्डे पर उनका स्वागत किया। उनके साथ भारत में एक सौ अरब डॉलर निवेश करने की बात हुई है। इससे एक दिन पहले ही वे पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा करके भारत आए थे। वहां भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान प्रोटोकॉल तोड़ कर सऊदी प्रिंस का स्वागत किया था। जाहिर है कि मोहम्मद बिन सलमान का दोनों तरफ समान असर है। इसका फायदा उठा कर सऊदी अरब ने भारत और पाकिस्तान के मामले मे दखल दिया। जिस दिन मिग-21 के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान ने पकड़ा उसके अगले दिन सऊदी अरब के राजदूत ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। उधर पाकिस्तान में भी मोहम्मद बिन सलमान का एक प्रतिनिधि इमरान खान से मिला। सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से बयान दिया कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने और शांति बहाली के प्रयास कर रहा है। कूटनीतिक मामलों में भारत की ऐसी बेचारगी वाली स्थिति तो कभी नहीं रही कि सऊदी अरब पंचायत करे। 

इसी तरह अमेरिका का मामला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हनोई में थे, जहां उनकी उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के साथ शिखर वार्ता हो रही थी। पर वार्ता विफल रही है। उस बारे में विश्व मीडिया को बताने के लिए ट्रंप बाहर आए तो उन्होंने भारत और पाकिस्तान के मसले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को लेकर उनके पास एक बहुत अच्छी खबर है। उन्होंने खबर का खुलासा नहीं किया, पर सारी दुनिया को पता चल गया कि वे पाकिस्तान की हिरासत में रखे गए भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान के रिहा होने की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसकी आधिकारिक घोषणा से पहले संकेत देकर यह मैसेज दे दिया कि यह काम अमेरिका करा रहा है। अमेरिका को भी भारत और पाकिस्तान के मामले में इस तरह की पंचायत करने का मौका पहले नहीं मिला है। पहले भारत-पाक में तनाव बढ़ने पर दुनिया चिंता करती थी, दोनों से शांति की अपील करती थी, पर दखलंदाजी नहीं होती थी। 

इतना ही नहीं सऊदी अरब और अमेरिका की तरह दुनिया की कम से कम तीन और महाशक्ति देशों ने इस मामले में परदे के पीछे से दखल दिया और शांति बहाली के प्रयास किए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरिजा मे और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस मामले में दखल दिए। परदे के पीछे से इन तीनों नेताओं ने भी दोनों देशों के शीर्ष नेताओं से बात किए और शांति बहाली से प्रयास किए। चीन चूंकि भारत को हमेशा पाकिस्तान के पायदान पर ही रखता है और दोनों को परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं मानता है इसलिए उसने परमाणु खतरे के नाम पर तो शांति प्रयास नहीं किया पर इस बात की कोशिश उसने भी की कि दोनों देशों में टकराव और नहीं बढ़े। सो, क्या यह माना जाए कि अब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बहाली के लिए जो दखलंदाजी दुनिया के देशों ने की है वह यहीं खत्म हो जाएगी या इसके बाद वे कश्मीर समस्या सुलझाने में भी हस्तक्षेप करते रहेंगे? अगर ऐसे ही अपरिपक्व अंदाज में कूटनीति हुई तो कुछ भी संभव है। 

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