इमरान की बनवा दी 56 इंची छाती!

इमरान खान को मैं भी लल्लू, नौसखिया मानता था। पाकिस्तानी सेना की कठपुतली। मगर आज पाकिस्तान में उनकी तूती है। वे इसलिए दुनिया में शांति दूत माने जा रहे हैं क्योंकि पुलवामा पर आंतकियों के हमले के  बाद भी उन्होंने भारत को सहयोग करने की लफ्फाजी की थी तो भारत की वायुसेना के बालाकोट पर हमले, फिर पाक वायुसेना के जवाब बाद भी शांति व बातचीत की पेशकश की। ऐसे ही विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने की संसद में घोषणा करते हुए भी पेशकश! 

और अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या बोलते मिले? चुरू की जनसभा में क्या बोला या अभिनंदन की रिहाई घोषणा के बाद अभी पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ जैसा जुमला बोला! तथ्य ध्यान रहें कि भारत की कोशिश, भारत का मिशन पाकिस्तान को दुनिया में बदनाम, आतंकी देश प्रमाणित करना था और है। मतलब हमारी एप्रोच थी कि हम पाकिस्तान को ठोकेंगे और दुनिया हमें शाबाशी देंगी। डोनाल्ड ट्रंप, पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी, सऊदी अरब के शेख प्रिंस सब भारत और नरेंद्र मोदी के साथ खड़े मिलंेगे। पाकिस्तान डुबेगा। यों भी वह वैसे ही कंगला है। बरबाद है, दिवालिया है, इस्लामी देश भी उसके साथ नहीं तो चीन भी नहीं!  इसलिए भारत के वायुसेना के आपरेशन को दुनिया का समर्थन होगा तो इमरान खान घबरा कर, पाकिस्तानी सेना घबरा कर मसूद अजहर, हफीज सईद जैसे आतंकी चेहरों से तौबा करेंगे। नरेंद्र मोदी के वायुसेना आपरेशन की वैसी ही वैश्विक वाहवाह बनेगी जैसी बिन लादेन को खत्म करने के ओबामा के आपरेशन की बनी थी। 

क्या दुनिया में कहीं वैसी वाह सुनाई दी है? ऐसा कुछ नहीं सुनाई दिया मगर हां, दुनिया ने यह जरूर जाना कि भक्त हिंदुओं ने जश्न मना, पटाखे फोड़ कर आंतक के खिलाफ जीत घोषित कर दी। हर तरफ शौर हमने ठोंक दिया पाकिस्तान को!  हमने मसूद अजहर, हफीज सईद की कमर तोड़ दी। इमरान खान को कठपुतली, लल्लू प्रमाणित कर डाला। इमरान भला कहां टिकते हैं अपने विश्व नेता नरेंद्र मोदी के आगे!  

पर क्या आज कहीं से भी किसी भी तरह इमरान खान दुनिया के दबावों में घिरे हुए, अपनी सेना के पीटे होने से, पाकिस्तानी जनता में थू, थू के पात्र बने हुए हैं? क्या वैश्विक मीडिया, वैश्विक नेताओं, वैश्विक कूटनीति, डिप्लोमेसी में कोई कह रहा है या कहेगा कि इमरान खान जंगखोर है? उन्हंे अछूत बनाया जाना चाहिए? 

हां, 14 फरवरी के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और इमरान खान विश्व बिरादरी में अछूत बनने के कगार पर थे। लेकिन आज नहीं है क्यों? इसलिए क्योंकि 14 फरवरी के बाद 26 फरवरी के भारतीय वायु सेना के आपरेशन ने दुनिया के आगे यह रिजल्ट नहीं रखा कि उसने इतने आंतकियों को मार गिराया है। राष्ट्रपति ओबामा का आपरेशन बिन लादेन की लाश का, सिर का प्रामाणित वैश्विक प्रदर्शन लिए हुए था जबकि नरेंद्र मोदी-अजित डोभाल के बालाकोट में कराएं हवाई हमले में आंतकियों के सचुमच के कैंप, सचमुच की लाशों का प्रदर्शन दुनिया के आगे हम नहीं दर्शा पाए हैं। 

इस कमी का कौन है दोषी?  एक ही सीधा जवाब बनता है कि भारत की वायुसेना को सही इंटलिजैंस सूचना देने में गड़बड़ी हुई है। जैसे पुलवामा में आतंकी हमले को रोकने में लापरवाही, चूक, इंटलिजैंस नाकामी हुई वैसे ही बालाकोट में आंतकियों के भारी ठिकाने और सैकड़ों आंतकियों के जमा होने की सूचना के मामले में वह लापरवाही और गलती है जिसने भारत का पक्ष कमजोर बनाया। सोचे, यदि ओबामा पाकिस्तान में वायु सेना से आपरेशन करा बिन लादेन को दुनिया के आगे नहीं पेश कर पाते तो उनकी कैसी किरकरी होती और पाकिस्तान तह बढ़ चढ़कर कैसे लाल पीला होता और दुनिया में ओबामा, अमेरिका की साख क्या बनती।  

वैसी ही भारत की दुनिया के आगे आज है। सो 14 फरवरी से आज 3 मार्च तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत की जनता ने जो पाया है वह सिर्फ और सिर्फ झाग है, लफ्फाजी है। अवसर और संस्था का दुरूपयोग है। अपने को याद हो आता है नोटबंदी के बाद क्योटों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बोला वह डायलाग कि देखों, देखों, गंगाजी में काला धन, पांच सौ, हजार रु के नोट बह रहे हंै!  वैसे ही अब झेलम का पानी बंद करके, बिना पुख्ता सूचना के बालाकोट में वायुसेना को झौक कर भक्तों को बरगला रहे हैं कि देखों सैकडों आतंकियों को मार दिया!  पाकिस्तान को प्यासा मारा दिया, उसका व्यापार चौपट कर दिया। इमरान खान को पिचका दिया! 

तभी तो मैं नोटबंदी के बाद से लगातार लिख रहा हूं कि हिंदूओं को राज करना नहीं आता है। डीएनए में है कोई ऐसा नुक्श जो हर सर्जिकल काम फर्जीकल बन जाता है।

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