शहादत पर सियासत करते नेता

कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने 27 फरवरी की अपनी बैठक में एक साझा बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने देश और सैन्य बलों के साथ खड़ा बताया। पर साथ ही यह आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा सेना और शहीदों के नाम पर सियासत कर रही है। उनके इस बयान के बाद पूरी भाजपा जैसे कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों पर टूट पड़ी। सबको देशद्रोही साबित किया और कहा कि विपक्षी पार्टियों का बयान पाकिस्तान को पसंद आ रहा होगा। पर हकीकत में तस्वीर दूसरी है। विपक्षी पार्टियों के बयानों से ज्यादा पाकिस्तान में भाजपा नेताओं का बयानों का इस्तेमाल हो रहा है। 

जैसे कर्नाटक प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने पाकिस्तान में घुस कर आतंकवादी शिविरों पर भारतीय वायु सेना द्वारा की गई कार्रवाई के बाद कहा कि इस कार्रवाई से भाजपा को बहुत फायदा होगा वह कर्नाटक में लोकसभा की 22 सीटें जीत जाएगी। येदियुरप्पा का यह बयान पाकिस्तानी मीडिया में खूब चर्चा में रहा। मीडिया के साथ साथ वहां के नेताओं ने भी भारत को कठघरे में खड़ा करने के लिए इस बयान का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए भारत सरकार इस तरह की कार्रवाई कर रही है। पाकिस्तानी मीडिया ने भी भारत की पूरी कार्रवाई को लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ कर ही दिखाया।

इसी तरह गुजरात प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता भरत पंड्या ने येदियुरप्पा से भी पहले इसी तरह के बयान दिए थे। उन्होंने तो भारतीय सेना की कार्रवाई की बजाय पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीआरपीएफ के जवानों के आतंकवादी हमले में मारे जाने की घटना का ही राजनीतिक इस्तेमाल करने की बात कह डाली थी। वडोदरा में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की मीटिंग में पार्टी प्रवक्ता भरत पंड्या ने कहा कि पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों के मारे जाने से पूरे देश में राष्ट्रवाद की हवा चल रही है और पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे इस एकजुटता और राष्ट्रवादी माहौल को वोट में कन्वर्ट करने के लिए काम करें। सैनिकों की शहादत पर ऐसी सियासत इससे पहले देखने को नहीं मिली। 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और भाजपा से जुड़े रहे मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय इससे एक कदम और आगे बढ़ गए। उन्होंने पुलवामा हमले के बाद कश्मीर के लोगों और कश्मीरी सामानों का बहिष्कार करने की अपील कर दी। और उनसे भी दो कदम आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे। उन्होंने भारतीय वायु सेना की कार्रवाई के दिन राजस्थान के चुरू में एक जनसभा की, जिसमें उनके मंच पर पुलवामा के 40 शहीद जवानों की फोटो लगी थी। शहीदों की फोटो लगा कर खुद प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से वोट मांगे। जब इस पर विवाद हुआ और सोशल मीडिया में सवाल पूछे जाने लगे तो शनिवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में कहा कि भाजपा ने चुरू में श्रद्धांजलि सभा रखी थी इसलिए शहीद सैनिकों की फोटो लगाई गई थी। पहले सैनिकों की फोटो लगा कर वोट मांगने की बेशर्मी और उसके बाद यह झूठा दावा कि वह श्रद्धांजलि सभी थी। क्या 40 जवानों की फोटो की बैकग्राउंड बना कर श्रद्धांजलि सभी होती है? अगर वह श्रद्धांजलि सभी थी तो किस शहीद की फोटो पर माला चढ़ाई गई थी और कहां फूल चढ़ा कर प्रधानमंत्री ने उनको श्रद्धांजलि दी? ऐसा नहीं है कि सैनिकों और शहीदों के नाम पर सियासत सिर्फ ऊपर बताए लोग ही कर रहे हैं। लगभग सारे नेता इस समय इस जोश में हैं कि अब तो जीत पक्की हो गई। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पूरे राज्य में होर्डिंग्स, बैनर लगवा दिए, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ उनकी फोटो है और लड़ाकू विमान उड़ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि ये तीनों नेता ही विमान उड़ा कर पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर रहे हैं। 

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