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मोदी की 151 सीटें अधिकतम!

तो अब खत्म होने को 17वीं लोकसभा का आखिरी सत्र! इस सत्र ने फिर बताया कि वक्त नरेंद्र मोदी के साथ नहीं है। उनकी कोई कोशिश फल नहीं रही। न बजट की घोषणाओं का असर बना। न बुधवार को नरेंद्र मोदी के लंबे- धांसू भाषण का 24 घंटे असर रहा। उलटे अगले ही दिन रॉफेल मामला का ऐसा धमाका हुआ कि मोदी मन ही मन पछता रहे होंगे कि उन्होने क्यों उलटा चोर चौकीदार को डांटे वाला वाक्य बोला।  बजट की घोषणाओं पर कोई चर्चा नहीं है। न राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदू कूच होंगे। फारवर्ड जातियों को दस फीसदी आरक्षण का झुनझुना बज कर आवाज गंवा बैठा है। बस, उम्मीद इतनी भर है कि 13 फरवरी को संसद सत्र खत्म होने के बाद से 5-8 मार्च तक विरोधी पार्टियों के नेताओं को मोदी भ्रष्टाचार के आरोपों में ईडी से जेल भिजवाए। लेकिन कोलकत्ता में ममता बनर्जी के धरने पर बैठने के बाद विपक्ष में जो एकजुटता दिखी और जनता में ममता का जैसे नैरेटिव बना उससे लगता नहीं कि राबर्ट वाड्रा, पी चिंदंबरम, अखिलेश यादव, एनसीपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से मोदी की कोई वाह, वाह बनेगी। फिर इन बातों की बजाय आगे प्रियंका गांधी वाड्रा को ले कर अधिक कौतुक, हल्ला बनना है। मोदी-शाह अपने प्रति कौतुक बनाने की कितनी ही कोशिश करे उससे ज्यादा प्रियंका के दौरे, सभाओं का हल्ला बनेगा। 

मौटे तौर पर ग्राउंड रियलिटी में भाजपा की गणित में केमेस्ट्री नदारत है। मैंने लोकसभा चुनाव में राज्यवार सीटों का जो अनुमान लगाया था उसकी पिछली लिस्ट में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मैंने राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ में भाजपा के लोकसभा अवसर अपेक्षाकृत बेहतर समझ आए थे, कांग्रेस की कमजोरियों, आगे ढ़ग के उम्मीदवार न दिखाई देने के कारण। लेकिन हाल में राजस्थान, मध्यप्रदेश जाने के बाद साफ लगा कि खुद संघ-भाजपाईयों में सत्ता से बाहर होने का गम नहीं है। कोई वसुंधरा सरकार को याद नहीं कर रहा है। राजस्थान में तो भाजपाई ही रीलिफ के मूड में दिखे। भाजपाई नेता घर बैठे है। सब यह भाव लिए हुए है कि देखते है, मोदी-शाह कैसे जीताते हैं। 

मतलब अशोक गहलौत, दिग्विजयसिंह- कमलनाथ, भूपेश बघेल कांग्रेस को पचास फीसदी से ज्यादा लोकसभा सीटे जीतवा सकते हंै। पहले मुझे इन राज्यों में कांग्रेस को चौथाई सीटे जीत सकने के आसार लग रहे थे। इस हल्के से परिवर्तन से जहां कांग्रेस की सीटे बढ़ रही है वहीं भाजपा की भी बंगाल, यूपी, ओडिसा के चलते कुछ संख्या बढ़ती लगती है। तभी आज के अपने अनुमान में भाजपा और कांग्रेस दोनौं 150-150  ऊपर जा रही है। हालांकि अपना मानना है कि कांग्रेस बनाम भाजपा के सीधे मुकाबले वाले राज्यों में प्रियंका गांधी की सभाओं, दौरों का असर भारी होगा। कांग्रेसी अब जोश से चुनाव लड़ेंगे। इसका महाराष्ट्र में असर होगा तो राजस्थान व मध्यप्रदेश में भी! 

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