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मायावती और सर्वे की हकीकत!

झूनझने और टोटके जैसी ही भाजपा की खामोख्याली वाली बाते मायावती व एबीपी सर्वे की है। हकीकत से कोसो दूर। यों अपन ने गुजरात चुनाव के बाद राज्यवार चार्ट बना कर अनुमान बताया हुआ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अधिकतम 180 सीटो में सिमटनी है। इस सप्ताह ज्योंहि मायावती ने कांग्रेस से एलायंस न बनाने की घोषणा की तो हल्ला भाजपा की पौ बारह का बना। संयोग की एबीपी का सर्वे आया और उसने ऐलान किया कि यदि आज लोकसभा चुनाव हुए तो एनडीए को 276 सीटे मिलेगी। 

दोनों ही बाते फर्जी! इसलिए कि मायावती के एलायंस का मतलब सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश है। यूपी में बसपा और समाजवादी पार्टी में एलायंस होना ही मतलब वाली बात है। और वह एलायंस होगा। मायावती और अखिलेश यादव में एलांयस की केमेस्ट्री बनी हुई है। ऐसा एलायंस होना यूपी में कांग्रेस को शामिल रखने वाला होगा। मायावती इतनी बेअक्ल नहीं है कि वे यूपी में जीत कर केंद्र में राजनीति याकि प्रधानमंत्री पद जैसा ख्वाब सोचे और सोनिया गांधी-राहुल गांधी को यूपी में चार-पांच सीटे देने जितना एलायंस भी न बनाए। लोकसभा चुनाव में तमाम छोटे दल, क्षत्रप कांग्रेस से एलायंस इसलिए बनाएगें क्योंकि राहुल गांधी ने बता रखा है कि उनमें प्रधानमंत्री बनने की भूख नहीं है। कांग्रेस दूसरे को बनाने का फैसला करेगी। क्या इसे मायावती नहीं समझती है? सीट, ताकत, सत्ता की मायावती में जो भी भूख है वह कांग्रेस के जरिए ही दिल्ली में जब पूरी होती है तो वह सपा-बसपा के एलायंस में कांग्रेस को क्या साथ नहीं लेगी? ध्यान रहे कि मध्य प्रदेश में एलायंस न होने का ठीकरा उन्होंने दिग्विजयसिंह, कांग्रेस नेताओं पर फोड़ा न कि सोनिया गांधी या राहुल गांधी पर। सो लोकसभा चुनाव की अधिसूचना के बाद मायावती, अखिलेश, राहुल, शरद पवार, ममता बनर्जी राज्यवार, चुपचाप जो सहमति बनाएगें वहीं निर्णायक होना है। 

सोचे यदि, राजस्थान-मध्यप्रदेश में कांग्रेस- बसपा का एलायंस बनता और भाजपा हारती तो मोदी-शाह पूरी स्पष्टता के साथ, दो टूक अंदाज में नतीजों के बाद जनता के सामने यह अखिल भारतीय सवाल बनवा देते कि एक तरफ है नरेंद्र मोदी तो दूसरी तरफ विपक्ष के संभावी कैबिनेट वाले मायावती, राहुल, ममता बनर्जी के चेहरे! किसे चुनेगे? 

मतलब आमने-सामने की सीधी लड़ाई का अभी से हल्ला बनता। इससे ब्रांड मोदी को आक्रामकता से लांच करने का मौका बनता। वह मायावती और कांग्रेस में मतभेद की चर्चा से टला है।

ऐसे ही एबीपी सर्वे में लोकसभा चुनाव की सूरत में एनडीए को 276 सीटे मिलने का ख्याली हल्ला है। हकीकत में यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि आठ महीने पहले भाजपा का 180 सीटों का जो मैं अनुमान लगाए हुए था उसके पास अब आंतकित मीडिया और उसके सर्वे भी पहुंच रहे है। एनडीए की सभी पार्टियों में मतलब जनता दल यू, शिवसेना, अकाली दल सहित, उत्तर-पूर्व, छोटी पार्टियों की भीड़ के 276 के आंकड़े में भाजपा 200 सीटों के आसपास ही बैठ रही है। वह भी तब जब बसपा-सपा के एलायंस के बावजूद सर्वे में यूपी में एनडीए को 36 सीटे मिलने का अनुमान है। सर्वे में मध्यप्रदेश में 23, राजस्थान में 18, छतीसगढ़ में 9 सीट का भाजपा की सीटों का अनुमान है। हरियाणा में 6, दिल्ली में सातों तो ओडिशा में भाजपा 13 सीट सर्वे में लेते हुए दिख रही है।  सोचे कि इस सर्वे में भाजपा की कथित 200 सीटों के अनुमान में भी कितनी भारी खामोख्याली है। सो सुधी माईबाप पाठक न तो मायावती के कांग्रेस से खिंचाव के ज्यादा अर्थ निकालने की जरूरत है और न सर्वे में एनडीए की 276 सीटों में उड़ने की या चिंता में आने की जरूरत है। 

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