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बड़ी हस्तियां ही निशाने पर

सुपारी देकर भाड़े के हत्यारों से हत्या कराना या डराना धमकाना आम तौर पर फिल्में या कारोबार से जुड़ी हस्तियों से पैसा वसूलने के लिए होता है। कभी-कभी आपसी रंजिश में गैंगस्टर माध्यम बन जाते हैं। बारह अगस्त 1997 को अंधेरी (मुंबई) के शिव मंदिर के बाहर फिल्म निर्माता और टी सीरिज के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई। पुलिस ने संगीतकार नदीम पर अबु सलेम की मदद से यह हत्या करवाने का आरोप लगाया। जनवरी 2001 में अब्दुल राउफ नामक व्यक्ति ने अपराध कबूल कर लिया। 
उसी साल जुलाई में निर्माता राजव राय पर हुए हमले में भी अबु सलेम पर शक जताया गया। राजीव राय के दफ्तर में दाखिल हुए पांच लोगों को पता नहीं था कि उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई है। एक हमलावर पकड़ा गया और चार भाग गए। इसी तरह निर्माता सुभाष घई की हत्या की योजना बनाने वाले वारदात से पहले ही दबोच लिए गए। फिल्मकार राकेश रोशन पर अबु सलेम के दो गुर्गों ने 21 जनवरी 2000 को हमला किया। राकेश रोशन अपनी कार में थे जब उन पर दो गोलियां दागी गईं। 

एक उनके बाएं हाथ में लगी और दूसरी छाती को खुरच कर निकल गई। 2001 में अबु सलेम के ही लोगों ने अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजित देवानी की इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उसने कथित तौर पर पैसा देने से मना कर दिया था। हत्या करने वालों में उत्तर प्रदेश का दीपक सिंह उर्फ दीपू था जिसे विक्रमगढ़ पुलिस ने 8 जुलाई 2009 को मुठभेड़ में मार गिराया।
उद्योगपति और बिल्डर अक्सर गैंगस्टर के निशाने पर रहते हैं। रंगदारी न देने पर उन पर आए दिन हमला होता है। 2001 में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने डिजिकेबल के एक पूर्व कर्मचारी सचिन घोपड़ को गिरफ्तार किया। वह कंपनी के बर्खास्त कर्मचारी मंदिहरपाल सिंह रावत के इशारे पर काम करता था। रावत ने पांच करोड़ रुपए की मांग की थी जिसके न दिए जाने पर छोटा राजन के गुर्गे इंदौर के मनोहर वर्मा को कंपनी के सीईओ व प्रबंध निदेशक जगजीत सिंह कोहली को मारने की सुपारी दी थी। 

सचिन की गिरफ्तारी से योजना सफल नहीं हो पाई। 16 फरवरी 2013 को नवी मुंबई में दिन दहाड़े बिल्डर सुनील लोहरिया की हत्या कर दी गई। एक हमलावर ने उस दनादन गोलियां बरसाई और दूसरे ने उसका सिर काट लिया। पुलिस ने इस सिलसिले में रिटायर पुलिस अधिकारी सैमुअल अमोलिक को गिरफ्तार किया जिसके बारे में पुलिस का मानना था कि उसके तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े थे। जांच से पता चला कि लोहारिया को मारने के लिए नवी मुंबई के बिल्डर सुरेश बिजलानी की तरफ से अमोलिक को सुपारी दी गई थी। 
अंडरवर्ल्ड की आपसी दुश्मनी में भी सुपारी का इस्तेमाल होता रहा है। 1992 में मुंबई के जेजे अस्पताल में शूटआउट हुआ जिसमें अरुण गवली के वहां इलाज करा रहे साथी शैलेश हलदनकर और उसकी सुरक्षा में तैनात दो कांस्टेबलों की मौत हो गई। बताया जाता है हलदनकर दाऊद के बहनोई इस्माइल पारकर की हत्या में शामिल था और दाऊद ने उसे मारने की सुपारी उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर ब्रजेश सिंह को दी थी। 
13 अगस्त 2008 को मटका किंग के नाम से मशहूर सुरेश भगत अपने पांच साथियों के साथ कार में जा रहा था कि एक ट्रक ने कार को कुचल दिया। जांच से पता चला कि सुरेश भगत की हत्या उसकी परित्यक्ता पत्नी जया और बेटे हितेश ने मटका कारोबार पर कब्जा करने के लिए कराई। गैंगस्टर अरुण गवली के खास गुर्गे सुहास रोग्ये को 25 लाख रुपए की सुपारी दी गई। 

अय्यर की तरह एक और पत्रकार ज्योतिर्मय डे भी अंडरवर्ल्ड का निशाना बने। जून 2011 में मोटर साइकिल सवार हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी। छोटा राजन ने ड को मारने के लिए सतीश कालिया को पांच लाख रुपए की सुपारी दी थी। सुपारी नेताओं को मारने के लिए दिए जाने का भी चलन रहा है। 3 जून 2006 को कांग्रेस नेता पवन राजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की मोटर साइकिल पर आए दो हमलावरों ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर हत्या कर दी। आरोप लगा कि उनकी हत्या सांसद पदम सिंह पाटील के इशारे पर की गई। दोनों हमलावर पारसमल जैन व दिनेश तिवारी पकड़े गए। उन्हें पहले से तय एक करोड़ रुपए की बजाए तीस लाख ही दिए गए क्योंकि उनके पिछले दो वार बेकार गए थे।

मुंबई से बाहर भी सुपारी लेकर हत्या होती रही हैं। 1975 में तब के राष्ट्रपति के ड्राइवर एनसी जैन ने भाड़े के हत्यारों से अपनी पत्नी विद्या की हत्या कराई। दिल्ली में ही 1981 में एक रेस्टोरेंट के मालिक भगवाना पंजाबी की सुपारी देकर हत्या कराई गई। पर्सनल प्वाइंट जिम के मालिक सुनील कौल की उसकी दो कर्मचारियों दीपा गुप्ता व सुजाता साहा की हत्या हुई। 

इसके लिए नगर निगम के कर्मचारी सुनील गुप्ता ने सुपारी दी। वह सुजाता से प्रेम करता था और उसे शक था कि सुजाता व कौल के बीच रिश्ता है। नवंबर 2003 में संपत्ति विवाद में पार्क रेजीडेंसी होटल के मालिक दिलीप सुरतानी की हत्या सुपारी देकर कराई गई। 
बहुजन समाज पार्टी के नेता दीपक भारद्वाज की हत्या सुपारी प्रथा के राजधानी में भी पैर पसार लेने की मिसाल है। दीपक भारद्वाज की हत्या के लिए पांच करोड़ रुपए की सुपारी दी गई थी जो अब तक की सबसे बड़ी रकम है। कानपुर में एक व्यवसायी ने भी 2016 में अपनी पत्नी की सुपारी देकर हत्या कराई। 
 

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