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शिक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा फंसे कर्ज का स्तर

 नई दिल्ली।  शिक्षा क्षेत्र में फंसे कर्ज का स्तर पिछले तीन वित्त वर्ष में लगातार बढ़ा है। मार्च 2018 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह करीब नौ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। शिक्षा क्षेत्र में ऋण देते समय घरेलू बैंक भारतीय बैंक संघ की शिक्षा कर्ज योजना का अनुसरण करते हैं।

इसमें ऋण के पुनर्भुगतान के लिए 15 वर्ष तक की अवधि मिलती है। इसमें किसी छात्र को पढ़ाई खत्म होने के बाद एक साल तक शिक्षा ऋण का पुर्नभुगतान करने से छूट मिलती है। इसके अलावा ऋण अवधि के दौरान बेरोजगारी या अर्द्ध- बेरोजगारी की स्थिति में दो से तीन बार यह छूट मिलती है।

भारतीय बैंक संघ के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2016 में शिक्षा क्षेत्र में बकाया ऋण बांटे गए ऋण का 7.3% था जो मार्च 2017 में बढ़कर 7.67% और मार्च 2018 में 8.97% हो गया।वित्त वर्ष 2017-18 की समाप्ति तक बांटा गया शिक्षा ऋण 71,724.65 करोड़ रुपये था जिसका 6,434.62 करोड़ रुपया फंसे हुए कर्ज में तब्दील हो गया।पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 7.86 लाख छात्रों को 13,470 करोड़ रुपये शिक्षा ऋण के रूप में बांटे।आंकड़ों के अनुसार पिछले साल तिमलनाडु से 1.5 लाख छात्रों ने शिक्षा के लिये कर्ज लिये। उसके बाद क्रमश: केरल (99,314) और कर्नाटक (90,630) का स्थान था।

 

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