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मप्र : सरकारी स्कूलों को उपहार लेने की छूट

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने अजीबो गरीब फैसला लिया है। सरकारी स्कूलों को समाज से उपहार लेने की छूट दी गई है और यह भी जाहिर किया गया है कि सरकार के पास स्कूलों की हालत सुधारने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। आधिकरिक तौर सोमवार को दी गई जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को विद्यालय उपहार योजना शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के तहत सभी सरकारी विद्यालय अपनी जरूरतों को चिन्हित कर उनकी पूर्ति के लिए समाज से उपहार प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के भौतिक एवं अकादमिक विकास के लिए समाज से नगदी नहीं, बल्कि वस्तु सहायता उपहार के रूप में प्राप्त करना है। स्कूल शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल पर विद्यालय उपहार नाम से मॉड्यूल उपलब्ध करवाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी विद्यालय अपनी आवश्यकताओं को विकासखंड स्रोत समन्वयक के माध्यम से अपलोड कर सकेंगे।

कहा गया है कि जो संस्था, ट्रस्ट, कंपनी, व्यक्ति या समूह 10 हजार रुपये तक की सामग्री सरकारी स्कूल को उपहार के रूप में उपलब्ध कराएगा, उसे विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा धन्यवादपत्र भी दिया जाएगा। योजना में 10 हजार रुपये से अधिक की सहायता करने वालों का नाम एजुकेशन पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। विद्यालय उपहार के तौर पर छात्रावास के किचन के लिए आवश्यक सामग्री, शुद्ध पेयजल के लिए फिल्टर, वाटर कूलर, पंखे, खेल सामग्री, फर्नीचर आदि ले सकेंगे। साथ ही अगर कोई विद्यालय परिसर में कुआं या ट्यूबवेल खनन करवाना चाहे, तो सहर्ष स्वीकार किया जाएगा। बताया गया है कि ग्वालियर जिले में जन-सहयोग से 400 टेबलेट कम्प्यूटर सरकारी स्कूल को उपलब्ध करवाए गए हैं। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदेश में सरकारी स्कूलों को सभी सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए जन-भागीदारी योजना चलाई जा रही है। योजना के माध्यम से स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ अधोसंरचना विकास के कार्य भी करवाए जा रहे हैं। अभी तक इस योजना के माध्यम से करीब चार करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए गए हैं।

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