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क्यों इतने हुए लाचार?

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trump tariffs india : अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का इरादा अप्रैल से जवाबी शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने का है, जिससे भारत की कठिनाइयां और बढ़ जाएंगी। सिटी रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक इससे भारत को सालाना सात बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।

भारतीय निर्यात के सामने अमेरिका और यूरोपीय संघ की कथित आक्रामक व्यापार नीतियों ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस बात को अब ऊंचे सरकारी अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।

विदेश व्यापार महानिदेशालय के प्रमुख संतोष षारंगी की ये टिप्पणी गौरतलब है- ‘समय का तकाजा है कि भारत अपनी व्यापर एवं औद्योगिक नीतियों पर व्यापक पुनर्विचार करे।’ (trump tariffs india)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ युद्ध’ और जो बाइडेन के दौर में बने चिप्स ऐक्ट से भारत की दिक्कतें बढ़ी हैं। ट्रंप का इरादा अप्रैल से जवाबी शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाने का है, जिससे भारत की कठिनाइयां और बढ़ जाएंगी।

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भारत को सालाना 7 बिलियन डॉलर का नुकसान (trump tariffs india)

सिटी रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक इससे भारत को सालाना सात बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। अब जाहिर हो रहा है कि वैश्विक वैल्यू चेन से कम जुड़ाव, कच्चे माल पर ऊंचे आयात शुल्क, और कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी पिछड़पन से भारत की निर्यात महत्त्वाकांक्षाओं पर चोट हुई है।

षारंगी के मुताबिक भारत को 2030-31 तक दो ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल करना है, जो उसे 14.4 प्रतिशत की वार्षिक निर्यात वृद्धि दर हासिल करनी होगी, जो अब तक जो स्थिति है, उसे देखते हुए बेहद मुश्किल मालूम पड़ता है।

पिछले दशक में औसत सालाना वृद्धि 5.2 फीसदी ही रही। सवाल है कि आसन्न संकट के मद्देनजर भारत ने क्या तैयारियां कीं? (trump tariffs india)

अब संकट सिर पर

भूमंडलीकरण का दौर पलट चुका है, इसके संकेत कम-से-कम सात साल से मिल रहे थे। इस दौरान पूंजीवाद का गढ़ कहे जाने वाले देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था में औद्योगिक नीति एवं नियोजन को वापस लाना शुरू किया।

बाइडेन काल में चिप्स ऐक्ट जैसे कदम और ट्रंप काल में टैरिफ तथा दुनिया भर के निवेशकों को अमेरिका लाने के आक्रामक प्रयास इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस दौर में भारत के नीति-निर्माता बेखबर बने रहे। (trump tariffs india)

अब संकट सिर पर है, तो मुक्त व्यापार या नए किस्म के समझौतों के जरिए हल तलाशने की कोशिश की जा रही है। इस मकसद से पिछले हफ्ते यूरोपियन यूनियन से वार्ता हुई। व्यापार मंत्री पीयूष गोयल इसी सिलसिले में अमेरिका में हैं। मगर अब माहौल प्रतिकूल हो चुका है।

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