नए कठघरे में फेसबुक

संपादकीय-2
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सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक पर अब ये इल्जाम लगा है कि उसने मशहूर तकनीक कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन इत्यादि के साथ अपने यूजर्स की निजी जानकारियां साझा कीं। कंपनी से लीक हुए अंदरूनी दस्तावेजों के अनुसार फेसबुक ने इन कंपनियों को यूजर्स के निजी संदेश और उसके दोस्तों की संपर्क जानकारियां तक पढ़ने की अनुमति दी। ये खुलासा अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने की है। इसके अनुसार फेसबुक ने नेटफ्लिक्स और स्पॉटिफाई (म्यूजिक ऐप) जैसी कंपनियों को भी यूजर्स के निजी संदेश पढ़ने की अनुमति दी। डेटा चोरी विवाद के बीच अमेरिका के बड़े कानूनी अधिकारी ने फेसबुक के खिलाफ डेटा चोरी के मामले में मुकदमा दायर किया है। फेसबुक पर 2016 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के दौरान कैंब्रिज एनालिटिका को निजी डेटा मुहैया कराने के आरोप लगे थे, जिसे उसने कबूल कर लिया था। कोलंबिया के अटॉर्नी जनरल कार्ल रैसीन की दलील है कि फेसबुक अपने उपभोक्ताओं की निजता की रक्षा करने में नाकाम रहा है। उसने यह बताने में भी उपभोक्ताओं को धोखा दिया है कि कौन उनके डेटा तक पहुंचा और उसका कैसे इस्तेमाल किया गया। मुकदमे में मांग की गई है कि फेसबुक यह सुनिश्चित करे कि वह अपने उपभोक्ताओं की निजता को नियंत्रित रखने के लिये प्रोटोकॉल और संरक्षण पर ध्यान देगा। साथ ही उपभोक्ताओं को अपनी निजता से जुड़ी सेटिंग्स को नियंत्रित रखने की प्रक्रिया को आसान बनाने के अलावा क्षतिपूर्ति भी करेगा। फेसबुक ने कबूल किया था कि कैंब्रिज एनालिटिका ने उसके 8 करोड़ 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं का डेटा चुराया।

नए मामले में आरोप है कि माइक्रोसॉफ्ट के सर्च इंजन ‘बिंग’ को बिना यूजर्स की अनुमति के उनके दोस्तों के नाम देखने और अमेजन को दोस्तों के नाम के साथ-साथ उनकी संपर्क जानकारी तक पहुंच बनाने की अनुमति फेसबुक ने दी। साथ ही फेसबुक ने याहू को दोस्तों की न्यूज़ फीड देखने दी, जबकि फेसबुक ने कहा था कि वह इस तरह की शेयरिंग सालों पहले ही बंद कर चुका है। गौरतलब है कि फेसबुक के लोगों की निजता से खिलवाड़ करने की खबरें लगातार मीडिया में छायी हुई हैं। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का कहना है कि इन सब के बावजूद दस्तावेज और फेसबुक और इसके कॉरपोरेट साझीदारों के 50 पूर्व कर्मचारियों के हवाले से पता चलता है कि फेसबुक द्वारा कुछ कंपनियों को डेटा एक्सेस दे रखा है। इससे अहम सवाल उठे हैं। उचित ही है कि इस कंपनी को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।
 

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