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सऊदी प्रिंस के झूठ!

संपादकीय-2
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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने यह तो मान लिया है कि पत्रकार जमाल खशोगी की मौत सऊदी कंसुलेट में हुई, लेकिन इससे इनकार किया कि उन्हें इस बारे में पता था। इसलिए ये सवाल उठा है कि सऊदी अरब की शासन व्यवस्था में क्या यह मुमकिन है या क्राउन प्रिंस झूठ बोल रहे हैं? लाजिमी है कि क्राउन प्रिंस के बयान पर यकीन करना बहुत से लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। क्राउन प्रिंस ने इस घटना के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को सजा दिलाने और इसकी जांच में तुर्की के साथ मिल कर काम करने का भरोसा दिलाया है। इससे पहले भी जब सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने मामले की पुष्टि की थी, तो उनके बयान में भी यह जताने की कोशिश की गई कि क्राउन प्रिंस को बगैर जानकारी दिए निचले दर्जे के कुछ अधिकारियों ने इस काम को अंजाम दिया। मगर क्राउन प्रिंस के बयान को खारिज करने वालों में सबसे पहले अमेरिका सामने आया। 

दरअसल, इसके बाद तुर्की की तरफ से जिस तरह से एक के बाद एक सबूत दिए गए, उनसे भी इस बात पर यकीन करना मुश्किल हुआ। कहा गया कि जो कुछ क्राउन प्रिंस कह रहे हैं वह बेबुनियाद है और अर्थहीन है। जैसा सऊदी शासन तंत्र है और उसमें खशोगी को जिस तरह से विद्रोही और सत्ताविरोधी के रूप में प्रचारित किया गया है, उसमें यह मुमकिन ही नहीं कि बिना क्राउन प्रिंस की मर्जी के इतना बड़ा काम कर दिया जाए। तुर्की से और कुछ मीडिया संस्थानों से जिस तरह की खबरें आईं, उनसे यह साफ हो जाता है कि इसकी काफी तैयारी की गई थी। उनकी हत्या से संबंधित सारी बातों को संदर्भ में जोड़ कर देखें, तो इस बात की कोई गुंजाइश नहीं बचती की क्राउन प्रिंस को इस बारे में नहीं पता था। जमाल खशोगी और सऊदी अरब के बीच जुड़े तारों को समझने के लिए पिछले दो सालों पर नजर डालें, तो कई और बातें सामने आती हैं। इन दो सालों में सऊदी अरब में जो भारी बदलाव हुए हैं, उनमें एक कड़ी जमाल खशोगी से भी जा कर मिलती है। जमाल खशोगी के सऊदी अरब के शाही घराने से रिश्ते इन दो सालों में ही बदले हैं। 

इसके पहले वह शाही घराने के बेहद नजदीक थे। सऊदी अरब के दो राजदूतों के वो मीडिया सलाहकार रह चुके थे। इसीलिए ये मामला इतना इतना उछला। 

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