Loading... Please wait...

पत्रकारिता में जारी जोखिम

संपादकीय-2
ALSO READ

पत्रकारिता का जोखिम कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि पत्रकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल दुनिया भर में पत्रकारों की मौत के मामले आठ फीसदी बढ़े हैं। 2018 के 11 महीनों में दुनिया भर में 80 पत्रकार मारे गए। आरएसएफ के मुताबिक इस दौरान 348 पत्रकारों को जेल में बंद किया गया। 60 से ज्यादा को बंधक बनाया गया। यह साफ है कि पत्रकार लगातार राजनीतिक और धार्मिक उन्माद का शिकार बन रहे हैं। हाल में जारी हुई आरएसएफ की रिपोर्ट में विस्तार से पत्रकारों के खिलाफ हो रही हिंसा का जिक्र है। रिपोर्ट कहती है कि 49 पत्रकारों की हत्या की गई। सं सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी और स्लोवाकिया के डेटा जर्नलिस्ट यान कुसिएक की हत्या का रिपोर्ट में खास तौर पर जिक्र किया गया है। आरएसएफ ने कहा कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा इस साल अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है और अब स्थिति गंभीर है। इस संस्था ने इसके लिए राजनेताओं, धार्मिक नेताओं और कारोबारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है। ध्यान दिलाया है कि कई मौकों पर पत्रकारों के खिलाफ खुलकर घृणा व्यक्त की जाती है। इसका बुरा नतीजा, पत्रकारों के खिलाफ विचलित करने वाली हिंसा में दिखाई पड़ रहा है। अफगानिस्तान अब भी पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश बना हुआ है। 2018 में वहां 15 मीडियाकर्मियों की मौत हुई। नौ पत्रकार तो सिर्फ 30 अप्रैल के दोहरे धमाके में मारे गए। भारत, अमेरिका और मेक्सिको जैसे युद्ध न झेलने वाले देश भी पत्रकारों के लिए जोखिम भरे बने हुए हैं।

मेक्सिको में इस साल नौ पत्रकारों की हत्या हुई। भारत में छह पत्रकार मारे गए। दोनों ही देशों में कई पत्रकारों ने जानलेवा हमले झेले और धमकियों का सामना भी किया। अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक शूटिंग के दौरान एक अखबार के पांच कर्मचारी मारे गए। सरकार या प्रशासन के खिलाफ अपनी राय जाहिर करने वालों के लिए चीन सबसे बड़ी जेल बना हुआ है। आरएएसफ के मुताबिक चीन में गैर पेशेवर पत्रकारों को बड़ी संख्या में कैद किया गया। सोशल नेटवर्कों या मैसेजिंग सर्विस में सिर्फ एक पोस्ट लिखने के कारण उन्हें अकसर अमानवीय परिस्थितियों में कैद किया गया। पेशेवर पत्रकारों के लिए तुर्की सबसे बड़ा कैदखाना बना। उसके बाद मिस्र, ईरान और सऊदी अरब का जिक्र है। पश्चिम एशिया के देशों में 2018 में 60 पत्रकारों को कैद किया गया।
 

241 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech