पहली परीक्षा में फेल

संपादकीय-2
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने की प्रधानमंत्री इमरान खान की कोशिश शुरू होने से पहले ही लड़खड़ा गई है। उन्होंने विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के विशेषज्ञों के लेकर एक आर्थिक सलाहकार परिषद बनाई। इसमें अहमदिया समुदाय के एक अर्थशास्त्री को रखा गया, तो कट्टरपंथी भड़क गए। तब उस विशेषज्ञ को हटा दिया गया। इसके विरोध में लंदन यूनिवर्सिटी से जुड़े अर्थशास्त्री इमरान रसूल ने इस्तीफा दे दिया। इस तरह ये सारा प्रयास गड़बड़ा गया है। आतिफ मियां एमआईटी में पढ़े पाकिस्तानी अमेरिकी प्रोफेसर हैं जो फिलहाल प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं। आतिफ मियां पाकिस्तान में लंबे समय से शोषित और पीड़ित रहे अहमदिया समुदाय से आते हैं। उनकी नियुक्ति की खबर आते ही मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। इस्लामिक गुटों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुस्लिम मानते हैं, लेकिन उनकी आस्था को इस्लाम की मुख्यधारा के ज्यादातर विचारकों ने ईशनिंदक माना है।

पाकिस्तान के संविधान में उन्हें गैर-मुस्लिम करार दिया गया है। सरकारी अधिकारियों ने पहले इस फैसले का बचाव किया था लेकिन धार्मिक गुटों के बढ़ते दबाव के आगे उन्होंने अपना रुख पलट दिया। पाकिस्तान में ईशनिंदा बहुत बड़ा अपराध है। इसकी वजह से मौत की सजा भी हो सकती है। सरकार ने हालांकि कभी भी किसी को ईशनिंदा के अपराध में मौत की सजा नहीं दी है, लेकिन इस तरह के आरोप लगने के बाद कभी गुस्साई भीड़ तो कभी कोई सिरफिरा या फिर उन्मादी लोगों का समूह हिंसक प्रदर्शनों पर उतारू हो जाता है। इसके चलते लोगों की हत्याएं भी हुई हैं। इमरान खान ने चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का पूरी तरह से बचाव किया था। बहुत से लोगों को चिंता है कि इस रुख के साथ इमरान खान चरमपंथी सोच को मुख्यधारा का हिस्सा बना रहे हैं।

इससे आगे चल कर देश में जातीय विभाजन, कट्टरपंथी गुटों का सशक्तिकरण और यहां तक कि हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है। पिछले महीने उनकी सरकार ने बड़े जोर-शोर से नीदरलैंड में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून प्रतियोगिता की योजना का विरोध किया था। इस्लामी गुटों ने पाकिस्तान में नीदरलैंड के साथ कूटनीतिक रिश्ते खत्म करने की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन किया। विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त इमरान खान सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि वहां जल्दी भुगतान संकट भयानक स्थिति में पहुंचने वाला है। 

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