गंभीरतम संकट में गंगा

संपादकीय-2
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गंगा सफाई को लेकर कई सारे दावे करती रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ वर्ल्ड वाइड फंड (डब्लूडब्लूएफ) की रिपोर्ट पर गौर करें, तो इस दावे पर गंभीर सवाल उठते हैं। डब्लूडब्लूएफ का कहना है कि गंगा दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी है। इस संस्था के मुताबिक 2,071 किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है, क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है। देश की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगा उत्तराखंड के कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है। गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है। गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल इलाके में विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है।

गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं, जबकि दक्षिण के पठार से आकर मिलने वाली प्रमुख नदियों में चंबल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि शामिल हैं। यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बन्दरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखंड से निकलती है। भारत में गंगा क्षेत्र में 565,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर खेती की जाती है, जो भारत के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग एक तिहाई है। आज दुखद स्थिति यह है कि गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है। गंगा किनारे लगातार बसाई जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी आदि में शौचालय तक नहीं हैं। इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल जाती है। कानपुर की ओर 400 किमी उलटा जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है।

इस शहर के साथ गंगा का गतिशील संबंध अब बमुश्किल ही रह गया है। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं, जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है। इनके परिणामस्वरूप नदियों के घटते जलस्तर और प्रदूषण ने पर्यावरणविदों और चिंतकों के माथे पर लकीरें ला दी हैं। डब्लूडब्लूएफ की ताजा रिपोर्ट से चिताएं और बढ़ेंगी। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि सरकार इस मामले में लाचार हो गई है। 
 

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