Loading... Please wait...

मुद्दा है प्रभावी अमल का

संपादकीय-2
ALSO READ

किसी समस्या पर सख्त कानून बनाना सरकारों के लिए सबसे आसान रास्ता होता है। महाराष्ट्र सरकार ने भी फिलहाल इसे ही अपनाया है। राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते खाने-पीने की सामग्री में मिलावट को ग़ैर-ज़मानती अपराध बनाने की घोषणा की। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गिरीश बताया कि सरकार मौजूदा क़ानून में संशोधन करेगी, जिससे खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालों को उम्र क़ैद की सज़ा हो सकेगी। राज्य विधानसभा ने इसके लिए आवश्यक संशोधन संबंधित विधेयक को पारित कर दिया है, लेकिन अभी यह विधेयक विधान परिषद में पारित नहीं हुआ है। राज्य सरकार ने कहा है कि मौजूदा शीतकालीन सत्र से पहले खाद्य मिलावट रोधक (महाराष्ट्र संशोधन) कानून को सदन में रखा जाएगा। उसका दावा है कि वह खाने-पीने के सामान में मिलावट के नतीजों को जानती है और इसे रोकने को पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शिकायत यह है कि दूध प्रसंस्करण कंपनियां किसानों से दूध ख़रीदती हैं, लेकिन जब तक यह उपभोक्ताओं तक पहुंचता है, यह ‘विषाक्त’ हो जाता है। दूध में डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया, स्किम्ड मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज़, रिफाइंड तेल, नमक और स्टार्च की मिलावट की जाती है, जिससे यह लोगों के सेवन के योग्य नहीं रह जाता। आम धारणा है कि लोग खाने-पीने के सामान में मिलावट को पकड़ नहीं सकते। खाद्य एवं दवा प्रशासन द्वारा औचक निरीक्षण के बावजूद मिलावट का यह सिलसिला जारी है। इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार ने ये बिल लाया है। इसके जरिए भारतीय दंड संहिता की धारा 272 से 276 और दंड प्रक्रिया संहिता की पहली अनुसूची में संशोधन किया जा रहा है। विधेयक में कहा गया है कि दूध और अन्य खाद्य पदार्थों के अलावा दवाओं में मिलावट लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

अभी तक इन अपराधों में छह महीने की सज़ा या जेल या दोनों का प्रावधान था। यह जुर्माना एक हजार रुपये तक हो सकता है। चूंकि यह अपराध गैर संज्ञेय और ज़मानती था इसलिए पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारी या दवा निरीक्षक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाते थे। ओड़ीशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल इसी तरह के क़ानून को पारित कर चुके हैं। लेकिन इस बारे में अभी तक कोई विश्वसनीय अध्ययन रिपोर्ट सामने नहीं आई है कि वहां इससे मिलावट रोकने में कोई मदद मिली हो। दरअसल, कानून चाहे जितना सख्त हो, असली चुनौती उस पर अमल की होती है। इसमें अपना प्रशासन अक्सर विफल रहता है। 
 

86 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech