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घाटी की हकीकत

संपादकीय-2
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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ बढ़ने की खबरें चिंता में डालने वाली हैं। पिछले कुछ समय तक यह दावा किया जा रहा था कि आतंकवादियों की कमर टूटी है और घुसपैठ में काफी आई है। लेकिन हाल में एक खुफिया रिपोर्ट से पता चला है कि घुसपैठ तो बढ़ ही रही है, साथ ही भाड़े के विदेशी आतंकियों की संख्या में इजाफा परेशान करने वाला है। इनमें अफगानी और दूसरे मुल्कों के लड़ाके हैं जो कश्मीर में तबाही के मकसद से भारत में घुसे हैं। इनकी संख्या सौ के पार है। भाड़े के आतंकियों का इस्तेमाल बड़े आत्मघाती हमलों में किया जाता है। इस वक्त कश्मीर घाटी जिस तरह की अशांति से जूझ रही है, उसमें भाड़े के आतंकियों की मौजूदगी से हिंसा और बढ़ने का खतरा है। पिछले एक हप्ते में ही सेना ने जगह-जगह आतंकियों को मारा है। यह इस हकीकत की पुष्टि है कि पिछले कुछ महीनों में घाटी में आतंकियों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी चौकसी की वजह से आतंकियों को घुसाने के नए तरीके निकाल लिए हैं। भाड़े के आतंकियों को अब बिना हथियार नेपाल के रास्ते भारत में घुसाया जा रहा है। इसके बाद कश्मीर पहुंचने पर आतंकी संगठन इन्हें हथियार देते हैं। ऐसे में सेना और सुरक्षा बलों के लिए यह गंभीर चुनौती बन गया है।

कश्मीर में हाल में हुए स्थानीय निकायों के चुनाव इस बात के गवाह हैं कि अब कश्मीर घाटी के ज्यादातर जिलों पर आतंकी संगठनों का कब्जा है। तीन-चार फीसद का मतदान लोगों के खौफ को बताता है। आतंकियों के डर से लोगों ने वोट तक नहीं डाले। कई इलाकों में तो डर के मारे उम्मीदवार ही खड़े नहीं हुए। मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि भले राज्यपाल अब ये दावा करते रहें कि उनके और दिल्ली के लिए ये चुनाव संतोषप्रद रहे और दक्षिण कश्मीर में भाजपा को अच्छी जीत मिली है, लेकिन जमीनी हकीकत बता रही है कि आतंकी अब राज्य सरकार पर भारी पड़ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में पुलिसकर्मियों के अपहरण और हत्याओं की घटना ने भी आतंकियों के बढ़ते दबदबे का अहसास करा दिया था। दरअसल, आतंकी घाटी में गहरी पैठ बना चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में उनका सूचना तंत्र मजबूत है। लोगों के पल-पल की खबर है, इसीलिए पता रहता है कि कौन पुलिसवाला या सेना का जवान छुट्टी में घर आ रहा है। इसीलिए अपहरण और हत्याओं की घटनाएं बढ़ीं। लेकिन राज्य का खुफिया तंत्र इसे भेद पाने में नाकाम रहा। आतंकियों की घुसपैठ नहीं रुकी तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ेंगे।

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