चर्च में यौन शोषण

संपादकीय-2
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क्या‍ भारत के चर्चों में पादरियों और बिशपों ने ननों का अथाह यौन शोषण किया है? समाचार एजेंसी एपी की एक छानबीन से ऐसी घटनाएं बड़े पैमाने पर होने के संकेत मिले हैं। इस अध्ययन के मुताबिक कैथोलिक चर्च के सेंटर कहे जाने वाले वेटिकन को लंबे समय से पता है कि एशिया, यूरोप, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में पादरी और बिशप ननों का यौन शोषण करते हैं। इसे रोकने के लिए वेटिकन ने बहुत ही कम कोशिशें की हैं। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने 2018 में यह रिपोर्ट लिखी थी। अब एपी ने भारत को चुनते हुए यहां ऐसे मामलों की पड़ताल की है। इस दौरान पता चला है कि भारत में दशकों से चर्च परिसर के भीतर ननों का यौन शोषण हो रहा है। ननों ने विस्तार से बताया कि कैथोलिक पादरी कैसे सेक्स के लिए उन पर दबाव डालते हैं। 

ननों, पूर्व ननों और पादरियों समेत दो दर्जन लोगों ने कहा कि ऐसे मामलों की उन्हें सीधी जानकारी है। इसके बावजूद भारत की ननों की समस्या धुंधली पड़ी रहती है। इसकी वजह चुप रहने की संस्कृति भी हो सकती है। कई ननों को लगता है कि शोषण तो आम है। कुछ को लगता है कि ऐसे मामले दुर्लभ हैं। लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं। ज्यादातर ननें तभी बात करती हैं, जब उन्हें यह तसल्ली दी जाए कि उनकी पहचान छिपाए रखी जाएगी। लेकिन 2018 की गर्मियों ने एक भारतीय नन को इस शोषण को सार्वजनिक करने के लिए मजबूर होना पड़ा। चर्च के अधिकारियों से बार बार शिकायत करने के बाद भी जब कोई उत्तर नहीं मिला, तो 44 साल की नन ने पुलिस ने केस दर्ज कराया। नन ने आरोप लगाया कि एक बिशप ने दो साल में 13 बार उनसे बलात्कार किया। इसके बाद भारत में कैथोलिक चर्च के केंद्र कहे जाने वाले राज्य केरल में पीड़ित नन के साथ अन्य ननों ने भी दो हफ्ते तक प्रदर्शन किया। ननों ने बिशप की गिरफ्तारी की मांग की। यह अभूतपूर्व कदम था, जिसने भारत के कैथोलिक समुदाय को बांट दिया। आरोप लगाने वाली नन और उनका समर्थन करने वाली ननों को कॉन्वेंट (ईसाई मठ) में अलग-थलग कर दिया गया। 1.3 अरब जनसंख्या वाले भारत में कैथिलक ईसाइयों की संख्या करीब 1.8 करोड़ है। ईसाई धर्मगुरु खुद पर लगे आरोपों को अल्पसंख्यक उत्पीड़न बताते रहे हैं। लेकिन अब पाप का घड़ा भर गया है और इस पर पर्दा डालना संभव नहीं लगता।

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