Loading... Please wait...

लोगों की जान से खिलवाड़

संपादकीय-2
ALSO READ

मेडिकल उपकरणों के बारे में हुए खुलासे से दुनिया चिंतित है। सामने यह आया है कि चिकित्सा उपकरणों की घटिया क्वालिटी और मनमानी कीमत के चलते हर साल मरीजों की जेब से अरबों डालर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जेब में जा रहे हैं। इसमें चिकित्सा के पेशे से जुड़े लोगों के अलावा तमाम एजेंट्स भी शामिल हैं। देश में इन उपकरणों का सालाना कारोबार 5.2 अरब अमेरिकी डालर का है, जिसके 2025 तक बढ़कर लगभग 50 अरब डालर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत चिकित्सा उपकरणों का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। इंटरनेशनल कंसोर्टियम आफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स और दुनिया भर के 36 देशों के 58 समाचार संगठनों के 250 से ज्यादा पत्रकारों ने कई देशों में जांच की। उसकी रिपोर्ट से चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में विश्वव्यापी गोरखधंधे का पता चलता है। मरीजों का अनुभव है कि चिकित्सा उपकरणों में बड़े पैमाने पर घोटाले हो रहे हैं।

मसलन, कोलकाता के एक मामले में डाक्टरों ने एक मरीज को हृदय में स्टेंट लगाने की सलाह दी। इस पर लगभग तीन लाख का खर्च बताया। लेकिन दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के एक अस्पताल में महज 60 हजार रुपए में यह काम हो गया। वह सवाल है कि आखिर एक ही चीज की कीमत में पांच गुना अंतर क्यों है? विशेषज्ञों का कहना है कि दरअसल हमाम में सब नंगे हैं। इनमें डॉक्टर, अस्पताल और फार्मा कंपनियां शामिल हैं। ऐसे में कोई किसी दूसरे पर अंगुली कैसे उठा सकता है? 36 देशों में साल भर तक चली जांच के दौरान जो जानकारियां जुटाई गई हैं, वे चौंकाने वाली हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकित्सा उपकरणों के बाजार में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को जानकारी दिए बिना ही तकनीकी गड़बड़ी वाले उपकरण लगा दिए जाते हैं। इसका नतीजा खतरनाक होता है। रिपोर्ट के मुताबिक एक ही उत्पाद का नाम, क्वालिटी और कीमत अलग-अलग देशों में अलग-अलग है। चिकित्सा उपकरणों के मामले में कहीं कोई आम सहमति नहीं है कि कौन सा उपकरण मरीज के लिए सुरक्षित है और कौन सा नहीं। इस मामले में न तो कहीं कोई चेतावनी प्रणाली है और न ही कोई नियामक संस्था। चिकित्सा उपकरणों में हर साल सैकड़ों की तादाद में तकनीकी खामियां सामने आई हैं। लेकिन मरीजों या उनके परिजनों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती। कई बार इन तकनीकी खामियों के चलते मरीजों की मौत हो जाती है या फिर उनकी हालत और बिगड़ जाती है। 

80 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

© 2019 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech