भारत में एआई की दस्तक

संपादकीय-2
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को रोजगार के लिए खतरा माना जाता है। लेकिन ये नई तकनीक है, जिससे बचना किसी देश या समाज के लिए मुश्किल हो रहा है। अब इस तकनीक ने भारत में भी दस्तक दी है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने भारत के कुछ कॉलेजों को एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजीज में छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए एक तीन साल का प्रोग्राम शुरु किया है। प्रोग्राम का नाम है- इंटेलिजेंट क्लाउड हब। कंपनी ने एक बयान में कहा कि ये समर्पित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) हब प्रोग्राम कुछ चुने हुए शोध और उच्च शिक्षा संस्थानों की मदद करेगा। इस प्रोग्राम से इन संस्थानों को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पाठ्यक्रम और फैकल्टी बनाने में भी मदद मिलेगी। इससे संस्थान अपने छात्रों को एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजीज में ट्रेनिंग दे सकेंगे और भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार भी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में शिक्षकों और छात्रों के लिए ऑनसाइट ट्रेनिंग, पाठ्यक्रम और भाग लेने वाले छात्रों के लिए क्लाउड और एआई सेवाओं, विकास उपकरण और डेवलपर सपोर्ट भी दिया जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया का का कहना है कि भविष्य में नौकरियों के लिए अलग तरह के स्किल की जरूरत पड़ेगी। इसलिए एआई की ट्रेनिंग जरूरी है। इंटेलिजेंट क्लाउड हब कार्यक्रम का सबसे बड़ा उदेश्य है कि ऐसी टेक्नॉलजी बनाना जो कि समाज और उद्योग दोनों के काम आ सके। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी ट्रेनिंग की जरूरत है। मगर सवाल वही उठेगा कि इस तकनीक के कारण रोजगार के जो अवसर खत्म होंगे, उनकी भरपाई क्या इस तकनीक की वजह से मिलने वाले रोजगारों से हो जाएगी? विकसित देशों में इस तकनीक के मद्देनजर सामाजिक सुरक्षा की नई योजनाएं बनाई जा रही है।

क्या भारत में ऐसा होगा? यानी एआई की ट्रेनिंग तो स्वागतयोग्य है, लेकिन इसके साथ ही उससे उठने वाले मुद्दों पर भी गौर किया जाना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट इस कार्यक्रम में एआई डेवलपमेंट टूल्स और 'अजूर' एआई सर्विसेज जैसे माइक्रोसॉफ्ट कॉग्निटिव सर्विसेज, एज़ूर मशीन लर्निंग और बॉट्ससर्विसेज भी देगा। शिक्षकों और छात्रों को वर्कशॉप में क्लाउड कंप्यूटिंग, डाटा साइंस, एआई और आईओटी जैसी तकनीक पर ट्रेनिंग मिलेगी। बहरहाल, एक मुद्दा यह भी उठा है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में औरतों के लिए जगह बनाना पहले से मुश्किल रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में यह और भी मुश्किल हो गया है। इसकी अनेक मिसालें हैं। दरअसल, ऐसे तमाम सवालों को हल करने की आवश्यकता है। 

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