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संपादकीय-2

हकीकत का घना साया

भारत का बचपन भूखा है। ये बात एक बार फिर ग्लोबल हंगर रिपोर्ट से जाहिर हुई है। संसार की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर भारत में पांच साल और पढ़ें....

जब रीढ़ ही कमजोर हो

आईएएस अफसरों को सरकार की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। फिर उनके लगभग एक चौथाई पद खाली हैं। इन खाली पदों की वजह से केंद्र के अलावा राज्यों को भी प्रशासनिक और पढ़ें....

आग में पड़ा घी

वाशिंगटन पोस्ट ने सीसीटीवी कैमरों से ली गई एक तस्वीर जारी की, जिसमें उसके रिपोर्टर जमाल खाशोगी को सऊदी कॉन्सुलेट में जाते देखा जा सकता है। यह तस्वीर एक और पढ़ें....

ब्राजील में लोकतंत्र को अलविदा?

बीते सालों में ब्राजील ना सिर्फ दक्षिण अमेरिका, बल्कि दुनिया के पटल पर अपनी आर्थिक प्रगति, राजनीति सुधारों और प्रगतिशील विचार की वजह से भी उभरा। समाज के और पढ़ें....

ये है समस्या का हल?

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में चाहे कृषि का हिस्सा कम हो रहा हो, लेकिन तकनीकी स्टार्ट अप्स अब इस क्षेत्र में तेजी से अपना दखल बढ़ा रहे हैं। पिछले कुछ सालों और पढ़ें....

एक वक्तव्य और सवाल

मी-टू आंदोलन के दौर में नोबेल कमेटी ने भी यौन उत्पीड़न के खिलाफ वक्तव्य देने की जरूरत महसूस की। ये कमेटी अक्सर ऐसे बयान शांति एवं साहित्य के लिए और पढ़ें....

महिलाओं से ही क्यों सवाल

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि मर्दों के लिए बेहद खतरनाक वक्त चल रहा है। संदर्भ है मी-टू मूवमेंट का। ट्रंप ने कहा कि 30-35 साल तक आप और पढ़ें....

बढ़ती संवेदनशीलता का संकेत

दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला सर्न में महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी करने पर एक वैज्ञानिक की छुट्टी कर दी गई। लेकिन इस मामले ने विज्ञान के क्षेत्र में और पढ़ें....

इंडोनेशिया की मदद जरूरी

इंडोनेशिया सुनामी के बाद की गंभीर हालत से निपटने की कोशिश में है। इसमें वो खुद को अक्षम पा रहा है। इसलिए उसने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। बीते और पढ़ें....

पर कतर तो बेफिक्र है!

2022 के फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल कतर के लुसैल शहर में होगा। शहर को चमकाने के लिए कतर 45 अरब डॉलर खर्च कर रहा है। लेकिन इस खर्चे में से कई मजदूरों को कुछ भी नहीं और पढ़ें....

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