सरकार की पलटी नीति

संपादकीय-2
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खुदरा कारोबारियों को खुश करने के लिए सरकार ने ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनियों पर नकेल कसी है। लेकिन इससे विदेशी निवेश के लिए रास्ते को बेरोक बनाने की उसकी नीति सवालों के घेरे में आई है। साथ ही उपभोक्ताओं को भी इससे नुकसान होगा, जिन्हें ये कंपनियां भारी डिस्काउंट दे रही थीं। क्या सरकार का यह कदम आम चुनाव के मद्देनजर हाथ-पांव मारने की कोशिश नहीं माना जाएगा? छोटे व्यापारी भाजपा का समर्थन आधार रहे हैं। लेकिन अब केंद्र की नीतियों से वे नाराज हैं, तो सरकार ने नया दांव चला है। ये कामयाब होगा या नहीं, यह तो नहीं मालूम लेकिन केंद्र की ई-कॉमर्स पर एफडीआई की नई नीति से ऑनलाइन कंपनियों में कोहराम मच गया है। केद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे ऐमजॉन और वॉलमार्ट की सहोयगी फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के लिए भारी डिस्काउंट और कैशबैक का रास्ता लगभग नामुमकिन कर दिया है। संशोधित नीति से सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में भारी बदलाव होगा। ऐमजॉन के स्वामित्व वाली होलसेल कंपनियां (ऐमजॉन होलसेल्स) और फ्लिपकार्ट के स्वामित्व वाली होलसेल कंपनियां (फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) ब्रांडेड माल काफी सस्ते भाव में मैन्युफैक्चरर्स से खरीदती है। इन सामानों को ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारी डिस्काउंट और कैशबैक के साथ 'सेलेक्ट सेलर्स' के जरिये बेचा जाता है। ऐमजॉन के मामले में सेलेक्ट सेलर्स वैसी कंपनियां हैं, जिनमें ऐमजॉन या इसकी किसी कंपनी की हिस्सेदारी होती है। सेलर्स ऐमजॉन की होलसेल कंपनी से माल खरीदती हैं। बिक्री के ताजा आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट की होलसेल इकाइयां उनकी कंपीटिटिव प्राइसिंग सेल्स का अहम हिस्सा है। ऐमजॉन की आमदनी वित्त वर्ष 2017-18 में 73 फीसदी बढ़कर 12,224 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

समान अवधि में फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की आय समान अवधि में 40 फीसदी वृद्धि के साथ 21,000 करोड़ रुपये दर्ज की गई। अब ऑनलाइन मार्केट प्लेस (ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट इत्यादि) की जिन सेलेक्ट सेलर्स में हिस्सेदारी होगी, वे कंपनियां अपना माल नहीं बेच पाएंगी। साथ ही ऐमजॉन की कंपनी ग्लोबल स्टोर भी ऐमजॉन इंडिया के मार्केटप्लेस पर बिक्री नहीं कर सकती। ऐमजॉन या फ्लिपकार्ट के पूर्ण स्वामित्व वाली होलसेल कंपनियों से कोई सेलर 25 फीसदी से अधिक माल नहीं खरीद सकता। बाकी का 75 फीसदी माल सेलर्स को दूसरी कंपनियों से खरीदना पड़ेगा। जहां तक कैशबैक की बात है, तो नए नियम में गैर-भेदभाव पूर्ण और निष्पक्ष तरीके से बिक्री की बात कही गई है। इनसे ऑनलाइन रिटेल कंपनियों का परेशान होना लाजिमी है। 

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