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अमेरिका का अंतर्विरोधी रुख

संपादकीय-2
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जी-20 शिखर बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत चीन के नजरिए से सार्थक रही। ट्रंप ने अगले एक जनवरी से लागू होने वाले व्यापारिक करों पर अमल ना करने का एलान किया। लेकिन क्या इससे चीन और अमेरिका के संबंध अब ट्रंप के सत्ता में आने के पहले जैसे सद्भावपूर्ण हो जाएंगे। कहना कटिन है। गौरतलब यह है कि अमेरिका प्रशांत क्षेत्र में एक स्थायी शक्ति है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इसी को ध्यान में रख कर ट्रंप ने जापानी और भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक की। इसे चीन के खिलाफ इन तीन देशों की मोर्चाबंदी के रूप में देखा जाएगा। चीन युद्ध की किसी भी स्थिति में' दक्षिण चीन सागर में दबदबा कायम करने में सक्षम है। प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच राजनीतिक और नौसैनिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ रही है। इसकी वजह दक्षिणी चीन सागर क्षेत्र, सागरीय नेविगेशन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सीमा विवादों को लेकर तनाव है। हाल में उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलनों और द्विपक्षीय बैठकों से साफ होता जा रहा है कि चीन इस क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक एजेंडे के निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।

इसी वजह से चीन और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता उभरी है। हाल में चीन क्षेत्र के बाकी देशों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि चीन का विरोध करने की बजाय उसके साथ सहयोग कहीं ज्यादा फायदेमंद है। चीन उन देशों का भरोसा जीतने में कायमाब रहता है जिन्हें अमेरिका खो चुका है। चीन लगातार ऐसी कोशिशों में जुटा है। वह एशियाई देशों को ऋण दे रहा है, उनके यहां बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए करार किए जा रहे हैं और सैन्य सहयोग बढ़ाया जा रहा है। चीन दक्षिणी चीन सागर के ज्यादातर हिस्से पर अपना संप्रभु अधिकार समझता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस पर विवाद है। इस सागर में कभी निर्जन पड़े रहे वाले टापूओं पर चीन बड़ी सैन्य तैनातियां कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रीय रक्षा रणनीति आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी सेना की सर्वोच्चता को 'खतरनाक हद' तक नुकसान हुआ है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिका इंडो पेसेफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए चीन से उलझने के बारे में सोचेगा? अर्जेंटीना में हुई जी-20 की बैठक दौरान इस बारे में अंतर्विरोधी संकेत ही मिले।

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