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कठघरे में केंद्र और आरबीआई

संपादकीय-2
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कठघरे में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक भी। घटनाक्रम ऐसा है कि उनके इरादों पर शक खड़ा होता है। शक यह कि वे उन लोगों को बचाना चाहते हैं जिन्होंने जानबूझ कर बैंकों से लिया कर्ज नहीं चुकाया है। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की हालिया कार्रवाई ने इस शक को और बढ़ा दिया है। आयोग ने जानबूझ कर बैंक ऋण नहीं चुकाने वालों की सूची का खुलासा करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन नहीं करने के लिए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीआईसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पूछा है कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के भेजे एनपीए के बड़े घोटालेबाजों की सूची पर क्या कदम उठाया गया। केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने एक वेबसाइट की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए ये कदम उठाया। आयोग ने इस बारे में 16 नवंबर 2018 से पहले जानकारी देने के लिए कहा है। उस वेबसाइट को आरटीआई के तहत आरबीआई से मिले जवाब से पता चला था कि रघुराम राजन ने 4 फरवरी 2015 को एनपीए के बड़े घोटालेबाज़ों के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा।

आरबीआई के मुताबिक राजन ने सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय ही नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय को भी ये सूची भेजी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक का ऋण लेने और जानबूझकर उसे नहीं चुकाने वालों के नाम के संबंध में आरबीआई द्वारा सूचना नहीं उपलब्ध कराने को लेकर नाराज सीआईसी ने उर्जित पटेल से यह बताने के लिए कहा है कि फैसले का ‘पालन नहीं करने’ को लेकर उन पर क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्होंने जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा करने को कहा था। सूचना आयोग का मानना है कि आरटीआई नीति को लेकर जो आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर कहते हैं और जो उनकी वेबसाइट कहती है उसमें कोई मेल नहीं है। आयोग ने यह निर्णय भी दिया कि इस अवहेलना के लिए रिजर्व बैंक के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को दंडित करने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने संस्थान के बड़े अधिकारियों के निर्देश के तहत ये कार्य किया। तो सीधे उर्जित पटेल घेरे में आ गए। लेकिन सवाल यह है कि पटेल या पीएमओ या वित्त मंत्रालय उन कर्जदारों को बचाना क्यों चाहते हैं? 

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