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ब्राजील में लोकतंत्र को अलविदा?

संपादकीय-2
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बीते सालों में ब्राजील ना सिर्फ दक्षिण अमेरिका, बल्कि दुनिया के पटल पर अपनी आर्थिक प्रगति, राजनीति सुधारों और प्रगतिशील विचार की वजह से भी उभरा। समाज के निचले तबके तक विकास के लाभ पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में हुई प्रगति ने दुनिया भर का ध्यान खींचा। लेकिन इसके कारण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती मौजूदगी ने यह बात भुला दी गई कि यह वही देश है जहां 1964 से लेकर 1985 तक तक सैनिक तानाशाही थी। अब एक बार फिर ब्राजील में तानाशाही का वही दौर याद आने लगा है। कारण यह है कि दरअसल सेना का एक पूर्व कप्तान देश की बागडोर संभालने का सबसे बड़ा दावेदार बन कर उभरा है। इस धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार ने एक झटके में देश की समस्याओं को हल करने का दावा किया है।

राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में उन्हें 46 फीसदी वोट भी मिल गए। जायर बोल्जोनारो सोशल लिबरल पार्टी के उम्मीदवार हैं। पार्टी के नाम में लिबरल जरूर लगा है, लेकिन बोल्जोनारो के तेवर बिल्कुल भी उदार नहीं हैं। पहले चरण में जीत के बाद बोल्जोनारो ने फेसबुक लाइव पर अपने विजय उद्घोष में कहा कि ब्राजील के लोग समृद्धि, आजादी, परिवार और ईश्वर की तरफ जाने वाला रास्ता पकड़ सकते हैं या फिर वेनेजुएला की राह पर जा सकते हैं। गौरतलब है कि पूरे लैटिन अमेरिका में इन दिनों यह नारा गूंज रहा है कि वामपंथी पार्टियों को  वोट देने का मतलब है देश का हश्र वेनेजुएला जैसा होगा। तो क्या ब्राजील में सचमुच दक्षिणपंथ की जीत हो गई है? जानकारों के मुताबिक बोल्जोनारो लोकतंत्र में न्यूनतम आस्था रखने वाले उम्मीदवार हैं। सेना उनके पक्ष में खुल कर आ गई है। उन्हें धार्मिक और धनी वर्गों का भी समर्थन मिल गया है।

ब्राजील में चर्चों के संगठन ने पिछले कुछ हफ्तों में बोल्जोनारो को समर्थन देने के लिए खुल कर प्रचार किया है। देश में उनके रेडियो स्टेशन भी चलते हैं और सोशल लिबरल पार्टी की जीत में उनकी भूमिका अहम है। बोल्जोनारो ने सरकारी कंपनियों को बेच कर अर्थव्यवस्था सुधारने के वादे और वामपंथी पार्टियों के खिलाफ जहर उगल कर समर्थन जुटाया है। नारीवाद और समलैंगिक नारों के प्रति गुस्सा और भ्रूण हत्या की मुखालफत, ये सब उनकी नीतियों में शामिल है। पेरिस जलवायु समझौते से बाहर आने का एलान भी बोल्जोनारो पहले ही कर चुके हैं। यानी ट्रंप की परिघटना ब्राजील में दोहराई जा रही है। और यही दुनिया में पैदा हुई चिंताओं का कारण है। 
 

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