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अमेरिकी प्रतिबंधों पर नज़र

संपादकीय-2
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ईरान के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते से पीछे हटते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 180 दिन में ईरान पर फिर प्रतिबंध प्रभावी होने का ऐलान कर दिया। इस प्रतिबंध का असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि ईरान से तेल खरीदना मुश्किल हो जाएगा। भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार देश है, जबकि भारत के लिए ईरान तीसरा सबसे बड़ा तेल बेचने वाला देश है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान मोटे तौर पर डॉलर में किया जाता है। ऐसे में अगर प्रतिबंध लगे तो भुगतान में मुश्किलें आती हैं और खरीदारी नहीं हो पाती है। लेकिन सवाल है कि आखिर ऐसे प्रतिबंध अपने मकसद को साधने में कितने कामयाब होते हैं। किसी देश के व्यापार पर बंदिश, अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय शुल्कों में बढ़ोतरी, बैंकों के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन पर रोक, कंपनी और व्यक्तिगत खातों को सील किया जाना आर्थिक प्रतिबंध होता है। इस तरह से उस देश की वित्तीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जाती है। शक्तिशाली देश अकसर इस उपाय को अपनाते हैं। मसलन सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक महाशक्ति अमेरिका ने क्यूबा, ईरान, उत्तर कोरिया जैसे देशों पर समय-समय पर प्रतिबंध लगाए हैं। अनुभव यह है कि आर्थिक प्रतिबंध लगने से न सिर्फ छोटे देश प्रभावित होते हैं, बल्कि उसके साथ व्यापार कर रहे दूसरे देश भी चपेट में आ जाते हैं।

गौरतलब है कि भारत के कुल आयात का 86 प्रतिशत भुगतान डॉलर में होता है, जबकि भारत के कुल आयात में मात्र पांच प्रतिशत हिस्सेदारी ही अमेरिका की है। दूसरी तरफ भारत के कुल निर्यात का 86 प्रतिशत डॉलर में होता है और कुल निर्यात में मात्र 15 फीसदी ही अमेरिका को जाता है। सभी देशों के केंद्रीय बैंक भी विदेशी मुद्रा भंडार में सर्वाधिक डॉलर ही रखते हैं। ऐसे में जब अमेरिका किसी देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता है तो इसका सीधा संदेश होता है कि दूसरे देश उसके साथ कारोबार न करें क्योंकि जब वे लेन-देन करेंगे तो यह डॉलर में होगा। यह लेन-देन अमेरिकी बैंकिंग तंत्र से गुजरेगा। अमेरिका उस लेन-देन को ट्रैक कर सकता है और प्रतिबंध लगे होने की स्थिति में उस भुगतान को रोक सकता है। अमेरिका की ओर से प्रतिबंध की घोषणा के बाद से ही भारत सरकार के स्तर पर यूरोपीय देशों से इस बारे में बातचीत हुई, ताकि ईरान से तेल खरीदने का कारोबार आगे भी चलता रहे। हालांकि अब तक इस दिशा में सफलता के संकेत नहीं मिले हैं। 

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