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समस्या इस मॉडल में है

संपादकीय-2
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अमेरिका के केंद्रीय संघीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने पिछले साल जून  में एक शोध किया। उसके मुताबिक अमेरिका में पढ़ने वाले छात्रों में से 42 फीसदी कर्ज के नीचे दबे हुए हैं। 20 साल के छात्रों पर ही औसतन 25,000 डॉलर का कर्ज चढ़ा हुआ है। जिन छात्रों ने 2016 में पढ़ाई शुरू की, उन पर औसतन 37,000 डॉलर का कर्ज है।  जॉब मार्केट की जैसी प्रकृति है, उसके मुताबिक नौकरा पाने के लिए ऊंची डिग्री लेना जरूरी होता जा रहा है। एक शोध के मुताबिक 2020 तक 65 फीसदी नौकरियां उन्हीं को मिलेंगी, जिनके पास कम से कम स्नातक की डिग्री हो। जबकि सरकारी कॉलेजों में अब चार साल की पढ़ाई का औसत खर्च 20,000 डॉलर है। प्राइवेट कॉलेजों में यह 50,000 डॉलर है। कर्ज लेने वाले छात्रों को औसतन हर महीने 351 डॉलर की किस्त भरनी पड़ती है। यह किस्तें दशकों तक चलती हैं। ज्यादातर छात्र दो साल बाद ही किस्त भरने में नाकाम हो जाते हैं और लोन डिफॉल्टर्स की श्रेणी में आ जाते हैं। कुल मिलाकर अमेरिका में चार करोड़ से ज्यादा छात्र कर्ज में दबे हैं।

स्टूडेंट लोन के 90 फीसदी मामलों में सरकार कर्ज देती है। यानी कर्जदाताओं के पैसे से ये कर्ज दिया जाता है। लेकिन ऋण न चुका पाने वाले छात्रों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे वित्त विशेषज्ञ चिंता में हैं। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक 2023 तक करीब 40 फीसदी छात्र कर्ज चुकाने में नाकाम हो जाएंगे। हो सकता है कि विशाल कर्ज के डूबने से 2008 की मंदी जैसे हालात पैदा हों। अमेरिकी मीडिया में अब स्टूडेंट लोन की तुलना 2008 में डूबे लेमन ब्रदर्स इनवेंस्टमेंट बैंक से हो रही है। लेमन ब्रदर्स इनवेस्टमेंट बैंक के डूबने के साथ ही अमेरिका में मंदी शुरू हुई। अमेरिका की मौद्रिक नीति तय करने वाले फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल अमेरिकी संसद से कह चुके हैं कि युवाओं का कर्ज में डूबना देर सबेर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने छात्रों को राहत देने के लिए कर्ज माफी का कार्यक्रम चलाया था। लेकिन डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में कर्ज माफी की 99.5 फीसदी अर्जियां खारिज कर दी गईं हैं। इससे ये समस्या बढ़ी है। इसके साथ ही अमेरिका में मुफ्त यूनिवर्सिटी शिक्षा का मुद्दा अहम होता गया है। ये साफ है कि रास्ता यही है। कर्ज लेकर पढ़ने के मॉडल की मुश्किलें अब जग-जाहिर हो चुकी हैं। 

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