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एक स्वागत-योग्य पहल

राजस्थान सरकार ने पिछले दिनों सामाजिक जवाबदेही कानून लाने की घोषणा की। इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जन भागीदारी का मुद्दा फिर से चर्चित हो गया है। माना यह जाता है कि सामाजिक जवाबदेही कानून से अन्य जन सुलभ कानूनों का रास्ता भी प्रशस्त होगा। सूचना का अधिकार कानून, सामाजिक जवाबदेही कानून, भ्रष्टाचार निवारण कानून, ये सब एक ही मकसद की तरफ जाते हैं। फिलहाल देश को एक मजबूत लोकपाल का इंतजार है। 12 राज्यों में तो लोकायुक्त भी नहीं हैं। जबकि 16 जनवरी 2014 को लागू हुए लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 में साफ लिखा हुआ है कि हर राज्य को अपने यहां लोकायुक्त बनाना होगा। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों से जवाब तलब किया था। वैसे भी कर्नाटक जैसे अपवाद को छोड़ दें तो जिन राज्यों में लोकायुक्त हैं, वे भी शिथिल और प्रभावहीन ही दिखते हैं। कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र ने सर्च कमेटी को लोकपाल की तलाश का काम फरवरी तक पूरा करने के लिए कहा। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर भाजपा 2014 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी। लेकिन आज तक उसने लोकपाल की नियुक्ति नहीं की। आम धारणा है कि लोकपाल और लोकायुक्त के साथ-साथ सामाजिक जवाबदेही कानून आ जाए और सुनवाई का अधिकार मिल जाए, तो सरकारें पारदर्शी ढंग से काम कर सकेंगी। इसलिए राजस्थान सरकार की ताजा पहल स्वागतयोग्य है।

सिविल सोसायटी कार्यकर्ताओं के साथ एक विस्तृत बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार सुनवाई का अधिकार जनता को देगी। ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य होगा। गहलोत का कहना है कि राज्य में गारंटीड डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज ऐक्ट पहले से लागू है। नए कानून को उसमें मिलाकर एक मजबूत और व्यापक प्रभाव वाले कानून की नींव रखी जाएगी। इस प्रस्तावित बिल का नाम होगा राजस्थान भागीदारी, जवाबदेही और सामाजिक अंकेक्षण बिल। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बिल का एक ड्राफ्ट भी राज्य सरकार को सौंपा है। इसके तहत एक लोक शिकायत निवारण आयोग और उसके साथ शिकायत निवारण अधिकारी या प्राधिकरण भी बनाया जाएगा। शिकायतकर्ताओं की समस्याओं के निराकरण के अलावा ये प्राधिकरण, अपवादों को छोड़कर उन्हें 25 हजार रुपये तक का मुआवजा भी दे सकता है। ड्राफ्ट बिल के मुताबिक प्रत्येक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह का यह अधिकार है कि उन्हें एक निश्चित समयसीमा के भीतर निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता में चिह्नित सेवाएं मुहैया कराई जाएं और उनकी शिकायतों का निवारण किया जाए।

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