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रक्षा क्षेत्र का यह हाल!

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने ये एलान बड़े गर्व से किया कि अब देश का रक्षा बजट तीन लाख करोड़ रुपये का हो गया है। लेकिन जल्द ही ये तथ्य सामने आ गया कि अगर मुद्रास्फीति को ध्यान में रखें असल में रक्षा बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वैसे भी इस क्षेत्र का हाल यह है कि रक्षा मंत्रालय द्वारा ठेकेदारों का बकाया 2000 करोड़ रुपये ना देने के चलते देश के कई सेना छावनियों  में कई महत्त्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भुगतान न कर पाने के चलते आठ रनवे को बढ़ाने का काम, तेजस के लिए एक सुलुर एयरबेस, छह हैंगर प्रोजेक्ट आदि लटक गए हैं। इनमें अंबाला और हाशिमीरा के प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो राफेल को रखने के लिए बनाए जा रहे हैं। मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएस-बीएआई) के मुताबिक सुलुर का रनवे, चंडीगढ़, सिरसा, पालम, इलाहाबाद, हैदराबाद, छाबुआ और दिनजन का काम या तो बंद हो गया है, या तो बेहद धीमा हो गया है। यही हाल सिरसा, अंबाला, हाशिमीरा, ककईकुण्ड़ा, छाबुआ और दिनजन के हैंगरों का भी यही हाल है। भुगतान न किए जाने की वजह से उधमपुर और पुणे में दो मिलिट्ररी अस्पतालों का काम प्रभावित हुआ है। उधमपुर का कुछ थोड़ा काम हुआ है, लेकिन पुणे के अस्पताल का लगभग पूरा काम बाकी है, जो अब ठप पड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘अदर देन मैरिड हाउसिंग प्रोजेक्ट’ का पुंछ, राजौरी, लेह, कारगिल, बारामूला और अन्य जगहों के काम भी ठप हो चुके हैं।

ठेकेदारों का कहना है कि 1600 करोड़ रुपये की देनदारियों के लिए रक्षा मंत्रालय की ओर से पिछले साल दिवाली के बाद केवल 250 करोड़ रुपये का फंड रिलीज किया गया। इससे मौजूदा समय में ठेकेदारों की केंद्र सरकार पर बकाया राशि करीब 1600 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जानकारों का कहना है सरकार की ओर से अगर 2000 करोड़ रुपये की राशि जल्द ही रिलीज नहीं होती और ठेकेदारों का भुगतान नहीं किया जाता, तो मौजूदा निर्माण परियोजनाओं का काम रोकने की मजबूरी बन जाएगी। वैसे रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के संबंधित विभागों को पैसा दिए जा रहे हैं। एमईएस-बीएआई के सदस्य सशस्त्र सेना की सभी तीन अंगों नौसेना, थल सेना और वायु सेना की मूल आधारभूत जरूरतों की पूर्ति करते हैं। यह इन परियोजनाओं के संचालन या रखरखाव का भी जिम्मा संभालते हैं।

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