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कितनी कारगर ये पहल?

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के नौजवानों की बेरोजगारी को कम करने के लिए एक पहल की है। ये पहल कितनी कामयाब होगी, ये कहना कठिन है। राज्य में हालात गंभीर हैं। मध्य प्रदेश में हर साल करीब 270,000 युवा ग्रैजुएट होने के बाद काम ढ़ूंढने वालों की कतार में शामिल होते रहते हैं। राज्य में बेरोजगारी से संबंधित आत्महत्याएं 2005 से 2015 के बीच करीब 20 गुना बढ़े हैं। पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि बेरोजगारी को कम करने के लिए वह कुछ बड़े कदम उठाएंगी। इसी चुनावी वादे को पूरा करते हुए कमलनाथ सरकार ने सभी राज्य वित्त पोषित उद्योगों के लिए 70 प्रतिशत नौकरियों में मध्य प्रदेश के स्थानीय लोगों को लेने का नया नियम बनाया है। पहले ये आंकड़ा 50 प्रतिशत का था। नई औद्योगिक नीति के मुताबिक अगर कोई मध्य प्रदेश में बड़ा या छोटा उद्योग शुरु करना चाहता है, तो वह सरकार से मदद ले सकता है। नया नियम सिर्फ उन्हीं उद्योगों के लिए है जो सरकार से मदद लेते हैं। वैसे एक हकीकत यह है कि प्रदेश में प्रशिक्षित और कुशल लोगों की भारी कमी है। इसलिए दूसरे राज्यों के लोगों को यहां रोजगार मिल जाता है। प्रदेश के कारोबारी भी मानते हैं कि अच्छे कुशल कामगर राज्य में कम हैं। उनके मुताबिक राज्य के कारोबारी अनस्किल्ड कामों के लिए तो स्थानीय लोगों को रखते हैं, मगर कुशल कामों के लिए 70 प्रतिशत लोग बाहर से आते हैं। 

सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए सभी जिलों में प्रशिक्षण सत्र और रोजगार मेले लगाने की योजना शुरु की है। ये नई औद्योगिक नीति का हिस्सा होगी, जिसमें युवाओं को प्रशिक्षण के लिए रजिस्टर किया जाएगा। जब तक उनकी नौकरी नहीं लगती तब तक उन्हें वजीफा भी दिया जाएगा। सरकार ने हर तीन से छह महीने के प्रशिक्षण के लिए करीब ढाई लाख लोगों को लेने का लक्ष्य रखा है। कुशल कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए 2018 में एशियाई विकास बैंक ने भोपाल में देश का पहला मल्टी-स्किल पार्क खोलने के लिए 15 करोड़ डालर दिए। उसका मकसद राज्य में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद देना है। राज्य में और कई प्रतिष्ठित संस्थान भी हैं। आईआईएम, आईआईएफएम और इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी यहां हैं। लेकिन इन सबके बावजूद मध्य प्रदेश में पिछले दो सालों में बेरोजगारी की समस्या सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। क्या राज्य सरकार की नई पहल से सूरत बदलेगी? 

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