विपक्षी एलायंसः बात बने तो अच्छा

विपक्ष अपनी संभावनाओं पर काफी कुल्हाड़ी मार चुका है। इसकी शुरुआत पिछले साल विधानसभा चुनावों के दौरान ही हो गई, जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस और बसपा (सपा भी) ने अलग-अलग रुख कर लिया। अगर यह नहीं होता तो मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस को स्पष्ट जीत हासिल हुई होती। लोकसभा चुनाव के सिलसिले में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-आरएलडी ने कांग्रेस को छोड़कर अपना गठबंधन बना लिया। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मैदान में उतार कर यह संदेश दे दिया कि वह मजबूती से चुनाव लड़ेगी। लेकिन व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में इसका मतलब भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा है। यह हुआ तो भाजपा की राह आसान हो जाएगी। ऐसा लगता है कि अब ये समझ विपक्षी दलों में आ रही है, हालांकि इसका कोई परिणाम निकलेगा, यह कहना अभी भी कठिन है। फिलहाल संकेत यह है कि अब भी यूपी के महागठबंधन में कांग्रेस शामिल हो सकती है। इसके लिए कांग्रेस ने पहल की है। मोदी सरकार को घेरने की रणनीति के तहत कांग्रेस महाराष्‍ट्र में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को दो तो एसपी को एक लोकसभा सीट दे सकती है।

महाराष्‍ट्र में दलित-मुस्लिम वोट बैंक को देखते हुए कांग्रेस का यह कदम महत्‍वपूर्ण कहा जा सकता है। इससे पहले प्रकाश आंबेडकर और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन कर लिया। कांग्रेस और राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रकाश आंबेडकर की बड़ी मांग (12 सीटों) पर राजी नहीं हुई। तो कांग्रेस बसपा के प्रति नरम हुई है। महाराष्‍ट्र की आबादी में 11. 5 फीसदी मुस्लिम और 7 प्रतिशत दलित हैं। इस वोट बैंक पर कांग्रेस-एनसीपी की निगाह होना लाजिमी है। अभी तक की रणनीति के हिसाब से महाराष्‍ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों में से 26 पर कांग्रेस और 22 पर एनसीपी अपने उम्‍मीदवार खड़े करेगी। अगर बीएसपी और एसपी भी कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में शामिल होती हैं तो इस फॉमूले में परिवर्तन करना होगा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस अपने कोटे से दो, जबकि एनसीपी एक सीट देने पर सहमति जता सकती है। कांग्रेस महाराष्‍ट्र में स्वाभिमानी शेतकरी संगठना के अध्‍यक्ष राजू शेट्टी को भी एक सीट देने को लेकर आशान्वित थी। लेकिन शेट्टी अब तीन सीटों की मांग कर रहे हैं। संभावना है कि उन्‍हें दो सीटें तक दी सकती हैं। महाराष्ट्र का फॉर्मूल कारगर हुआ तो उससे उत्तर प्रदेश की राह भी निकल सकती है। ऐसा हुआ तो विपक्षी दलों के लिए यही अच्छा होगा।

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