रक्षा तैयारी का चिंताजनक हाल

पाकिस्तान से बढ़े तनाव का एक चिंताजनक परिणाम भारत की कमजोर रक्षा तैयारियों पर ध्यान जाना है। विदेशी अखबारों पर यकीन करें तो संकेत मिलता है कि भारत फिलहाल लंबा युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। कुछ रिपोर्टों में इस तरफ ध्यान दिलाया गया है कि भारत न तो खुद उन्नत हथियार विकसित कर पाया है, न ही उनकी खरीद के लिए तेज और पारदर्शी प्रक्रिया खोज पाया है। नौकरशाही को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत की उम्मीद सिर्फ अपने सैनिकों की हिम्मत, मनोबल और जज्बे से है। भारतीय सैनिक पुराने पड़ चुके लड़ाकू विमानों और खस्ताहाल राइफलों से लड़ने को तैयार है। फरवरी 2010 से लेकर अप्रैल 2017 के बीच भारत की सेनाओं के 20 विमान और हेलिकॉप्टर क्रैश हुए। हादसे का शिकार होने वाले विमानों में अमेरिका से खरीदा गया अत्याधुनिक विमान सी-130 जे हरक्यूलिस भी शामिल है। ऐसे छह विमान 6,000 करोड़ रुपये में अमेरिकी कंपनी बोइंग से खरीदे गए थे। खरीद के चार साल बाद ही उनमें से एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बिना किसी सैन्य ऑपरेशन के क्रैश होने वाले विमानों में रूस से खरीदा गया कार्गो एंतोनोव एएन-32 और सुखोई-30 जैसा अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भी शामिल है। इनके अलावा इस अवधि के दौरान चार मिग-21, चार जगुआर, दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर, दो चीता हेलीकॉप्टर, दो किरण ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट, एक मिराज, एक बीएई सिस्टम हॉक जैसे विमान भी हादसे का शिकार हो गए।

इनमें मिग-21 और जगुआर तो ऐसे लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें दुनिया की ज्यादातर सेनाएं रिटायर कर चुकी हैं। 1964-65 से लेकर अब तक भारतीय वायुसेना के करीब 400 मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इनमें से ज्यादातर हादसे शांति काल के दौरान हुए हैं। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायुसेना ने हाल के संघर्ष में अपना विमान ऐसे देश के खिलाफ खोया, जिसकी सेना उसकी आधी और सैन्य बजट एक चौथाई से कम है। इस रिपोर्ट से भारत के रक्षा विशेषज्ञ भी सहमत हैं। उनके मुताबिक भारतीय वायुसेना में 42 स्वाड्रन हैं। फिलहाल इनमें से 30 ही सक्रिय हैं। 2022 तक सक्रिय स्क्वॉड्रनों की संख्या 24 रह जाएगी।  एक स्क्वॉड्रन में 16 से 18 लड़ाकू विमान होते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अगर कड़ा युद्ध छिड़ जाए तो भारतीय सेना के पास सिर्फ दस दिन का गोला बारूद है। भारत के 68 फीसदी सैन्य उपकरण बेहद पुराने हैं। आधिकारिक रूप से इन्हें विटेंज कहा जाता है। क्या ऐसी रक्षा तैयारी चिंता का कारण नहीं होगी?

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