संपादकीय-1

अपने-आप को धोखा देना!

नरेंद्र मोदी सरकार अगर भारत की जनता के बेवकूफ नहीं समझती, तो वह ऐसी बातें नहीं करती। मगर इस सरकार की सोच यह है कि अगर किसी अस्तित्वहीन बात को भी लगातार और पढ़ें....

आखिर ये जल्दबाजी क्यों?

राजनीतिक मकसद से पुलिस कैसे काम करती है, यह उसकी ही एक मिसाल है। दिल्ली की एक अदालत ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और पढ़ें....

सवर्णों को थोथा झुंझुना!

सवर्ण आरक्षण पर बहस के दौरान राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने एक ऐसा झुंझुना दिखाया था, जो बजता नहीं है। उन्होंने कहा कि गरीब सवर्णों को और पढ़ें....

उलटा पड़ता हर दांव

देश के पूर्वोत्तर राज्य असम में बीजेपी का हर दांव उल्टा पड़ रहा है। वह चाहे एनआरसी का मामला हो या फिर नागरिकता अधिनियम का। अब छह जातीय गुटों को अनुसूचति और पढ़ें....

अब कठघरे में एनकाउंटर्स

उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित मुठभेड़ों का मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश को इस बारे में नोटिस जारी किया है। और पढ़ें....

नैतिकता का सवाल कायम

जस्टिस एके सीकरी ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले उस पद को लौटा दिया, जिसकी पेशकश केंद्र सरकार ने की थी और जिसे लेने पर वे पहले राजी हो गए थे। पद से लेने से और पढ़ें....

कंपनी से रियायत क्यों

इसे जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के लिए एक बड़ी राहत माना जा सकता है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका की मशहूर फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ और पढ़ें....

योजना पर प्रचार भारी

प्रधानमंत्री का धुआंधार आत्म प्रचार अब उनकी योजनाओं को भारी पड़ने लगा है। इनको लेकर गैर-भाजपा राज्य सरकारों में विरोध भाव पैदा होने लगे हैं। ताजा खबर यह और पढ़ें....

इस आरक्षण पर कई सवाल

गरीब सवर्णों को उच्च शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण के जरिए बिल लोकसभा से पास करा लिया है। केंद्र सरकार के इस कदम को सरकार और पढ़ें....

सरकार को तगड़ा तमाचा

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को पद पर बहाल कर दिया। जाहिर है, यह केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका है। वैसे कोर्ट ने कहा कि वर्मा फिलहाल कोई और पढ़ें....

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