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बढ़ते आर्थिक संकट के संकेत

भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत बदहाल है और लगता है कि इसके सूत्र सरकार के हाथ से निकल गए हैं। ताजा आंकड़े इसी बात की पुष्टि करते हैं। मसलन, चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में पिछले 14 साल में सबसे कम निवेश हुआ। निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की ज्यातादर प्रमुख सेक्टर में यह कमी देखने को मिली। सेंटर फॉर मोनेटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने सितंबर तिमाही की अपेक्षा दिसंबर महीने की अंतिम तिमाही में 53 फीसदी कम निवेश किया। निजी क्षेत्र में पिछले वित्त वर्ष 2018 की तुलना में चालू वित्त वर्ष 2019 में 55 फीसदी कम निवेश हुआ। दूसरा आंकड़ा यह है कि भारतीय विनिर्माण उद्योग की वृद्धि दर बीते दिसंबर महीने में सुस्त रही। इस दौरान उत्पादन में कमी दर्ज की गई। ये हालात तब हैं, जबकि विनिर्माण कंपनियों की ओर से कीमतों में कमी की गई है। ये बात ‘निक्केई मैनुफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई)’ के एक सर्वे से सामने आई है। इस सर्वे के मुताबिक दिसंबर महीने में विनिर्माण क्षेत्र की रेटिंग 53.2 अंक रही, जबकि नवंबर में ये 54.0 था। दरअसल 50 से अधिक रेटिंग वृद्धि का संकेत देती है। जबकि इससे नीचे आने पर विनिर्माण क्षेत्र के सिकुड़ने का रुझान मिलता है। 

दरअसल, सबसे चिंताजनक है कि निवेश में गिरावट आना। निवेश गिरने का मतलब है उत्पादन में गिरावट। इसके पीछे मुख्य कारण है बाजार में पर्याप्त मांग नहीं होना। इस हाल में रोजगार बढ़ने की बात सोची भी नहीं जा सकती। गौरतलब है कि प्राइवेट कंपनियों ने नई परियोजना को शुरू करने में कम दिलचस्पी दिखाई है। नई परियोजनाओं के शुरू होने में इस साल लगातार गिरावट देखने को मिली है। चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही की तुलना में दिसंबर तिमाही में 64 फीसदी नए प्रोजेक्ट शुरू हो पाए। वित्तीय वर्ष 2018 की अंतिम तिमाही की तुलना में चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 64 फीसदी की गिरावट आई है। सार्वजनिक क्षेत्र में भी नई परियोजनाओं की शुरुआत धीमी रही है। सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2019 में पिछले साल की तुलना में 50,604 करोड़ रुपया कम निवेश हुआ है। वित्तीय वर्ष 2019 की सितंबर तिमाही की तुलना में दिसंबर तिमाही में 37 फीसदी की कमी आई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2018 में इसी तिमाही की तुलना में यह 41 फीसदी कम है। हैरतअंगेज यह है कि इसके बावजूद सरकार सब कुछ हरा-भरा होने के दावे करती है।

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