Friday

04-04-2025 Vol 19

अपन तो कहेंगे

कैसे बचे बांग्लादेशी हिंदू?

कैसे बचे बांग्लादेशी हिंदू?

यह बात दिल-दिमाग को सचमुच बैचेन किए हुए है कि करनी शेख हसीना और नरेंद्र मोदी की लेकिन भरनी लाखों-लाख हिंदू परिवारों की, अपनी माटी में थर्राते हुए जीने...
हसीना का हश्र और भारत!

हसीना का हश्र और भारत!

हां, सबक इस नाते कि बांग्लादेश में उलटफेर न केवल भू राजनीति में भारत को भारी झटका है वही भारत के अंदरूनी हालातों में सोचने का एक पहलू भी...
ड्रैगन (चीन) का सुनहरा समय!

ड्रैगन (चीन) का सुनहरा समय!

चीन बनाम भारत में क्या फर्क है? तो चीन आग उगलते ड्रैगन का पर्याय है वही भारत हाथी, गाय, भेड-बकरियों का वह शाकाहारी जंगल है, जो नियति के सर्कस...
हिरोशिमा में तिहरे खतरे के बादल!

हिरोशिमा में तिहरे खतरे के बादल!

होमो सेपियन ने वह मशीनी दिमाग-माइंड बना डाला है जो जैविक मनुष्य दिमाग से सीमाहीन सुपरफास्ट है।
‘न्यू इंडिया’ में ‘नया इंडिया’, वर्ष-14, अंक-1

‘न्यू इंडिया’ में ‘नया इंडिया’, वर्ष-14, अंक-1

यदि वैदिकजी होते तो वे आज लिखते हुए हिंदी पत्रकारिता में ‘नया इंडिया’ के प्रयोग का अर्थ बताते। एक दफा उन्होंने ‘नया इंडिया’ को हिंदी पत्रकारिता का कंठहार बताया।
बांध फूटा! क्या मोदी मानेंगे?

बांध फूटा! क्या मोदी मानेंगे?

भाजपा बह गई। मतदाताओं ने भाजपा को कांग्रेस से अधिक महाभ्रष्ट करार देकर उसे प्रदेश से बेदखल किया। पर मोदी क्या ऐसा मानते हुए होंगे?
हम राक्षस बनेंगे या खत्म होंगे?

हम राक्षस बनेंगे या खत्म होंगे?

कल्पना करें अब मनुष्य का दिमाग, उसकी भाषा, भाषा से बनी कहानियों का काम मशीन करने लगे तो क्या होगा?
मोदी अधिक घायल या केजरीवाल?

मोदी अधिक घायल या केजरीवाल?

किसी भी रूप में गालियों की खर-पतवार से वोट की फसल पकाने की कला दुनिया को यदि किसी से सीखनी चाहिए तो भारत की हिंदू राजनीति से सीखनी चाहिए।
सत्यपाल मलिक तब पूरा सच क्यों नहीं बोले?

सत्यपाल मलिक तब पूरा सच क्यों नहीं बोले?

फरवरी 2019 में सत्यपाल मलिक ने नरेंद्र मोदी और अजित डोवाल की ही तरह राष्ट्रधर्म नहीं निभाया। कम-अधिक का अनुपात भले हो लेकिन तीनों भारतीय जवानों की बेमौत, मौत...
बुद्धिहीन-अशक्तकौम का दुकान सत्य!

बुद्धिहीन-अशक्तकौम का दुकान सत्य!

आप देश के कोने-कोने में घूम जाएं, जिधर देखो-उधर दुकान! जीवन जीने का व्यवहार खरीद-फरोख्त, लालच, धंधे की वृत्ति-प्रवृत्ति लिए हुए मिलेगा?
भारतः एक दुकान!

भारतः एक दुकान!

जवाब में राजा नरेंद्र मोदी का यह सत्य वचन- चलिए, आज आपकी दुकान चला देता हूं। ये वाक्य क्या भारत की दुकान सच्चाई के पर्याय नहीं हैं?
अदानी भी सरकार हैं!

अदानी भी सरकार हैं!

यह बात क्या आज लोगों के दिल-दिमाग में नहीं है? यदि नरेंद्र मोदी का नाम बतौर सरकार घर-घर में है तो अदानी भी भारत के घर-घर पहुंच गए है।
मोदीजी, मेरी दुकान भी चला दीजिए!

मोदीजी, मेरी दुकान भी चला दीजिए!

मेरे पास जवाब नहीं है। इसलिए क्योंकि मैं वह सनातनी हिंदू हूं, जिसने लुटियन दिल्ली का सत्ता धर्म नहीं निभाया। मैंने चारण परंपरा नहीं निभाई।
हम हिंदू और रूसी एक से, तभी जैसे पुतिन वैसे मोदी!

हम हिंदू और रूसी एक से, तभी जैसे पुतिन वैसे मोदी!

रूसियों के बंधुआ जीवन का इतिहास यों भारत से कुछ सदी कम है मगर उनका गुलाम जीवन का सर्फडोम अनुभव बहुत त्रासद।
भारत में दौड़ेगी कृत्रिम बुद्धि!

भारत में दौड़ेगी कृत्रिम बुद्धि!

आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस के चैटजीपीटी का जो शुरुआती अनुभव है तो वह इस नाते कमाल का है कि मशीनी दिमाग भारत की सभी प्रमुख भाषाओं में बुद्धि देते हुए है।
डॉ. वैदिकः हिंदी पत्रकारिता और खाली!

डॉ. वैदिकः हिंदी पत्रकारिता और खाली!

सोचें, ‘नया इंडिया’ का पहले पेज का बॉटम आज से बिना डॉ. वैदिक की उपस्थिति के होगा।
केजरी, अखिलेश, ममता, केसीआर, हेमंत, राहुल का अहंकार जेल से  खत्म होगा या चुनावी सफाये से?

केजरी, अखिलेश, ममता, केसीआर, हेमंत, राहुल का अहंकार जेल से खत्म होगा या चुनावी सफाये से?

अहंकार अपनी वोट गणित से नरेंद्र मोदी को हरा देने का। पर तय माने हिंदूशाही विपक्ष को मिटा देने वाली  है।
अखंड भारत अब चीन का उपनिवेश!

अखंड भारत अब चीन का उपनिवेश!

साम्राज्य और वर्चस्व का इक्कीसवीं सदी का नुस्खा साहूकारी-लाठी तथा वैचारिक दबंगी है। आदर्श प्रमाण चीन है।
भला भारत में राजनीति से संन्यास!

भला भारत में राजनीति से संन्यास!

रायपुर के कांग्रेस अधिवेशन में सोनिया गांधी ने ‘पारी खत्म’ होने की बात कही। राजनीति से रिटायर होने का संकेत दिया। पर क्या यह संभव है?
वाह! यूक्रेन का मानव जज्बा, सलाम

वाह! यूक्रेन का मानव जज्बा, सलाम

कुल मिलाकर यूक्रेन मानव जज्बे की नई मिसाल है तो यूरोपीय संघ और ब्रिटेन, अमेरिका की पश्चिमी सभ्यता के इरादों का खुलासा भी है।
गुलाम संस्कारों के हिंदुओं के लोकतंत्र की क्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन चिंता करें?

गुलाम संस्कारों के हिंदुओं के लोकतंत्र की क्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन चिंता करें?

दिल्ली में बीबीसी पर छापे के दिन एयर इंडिया के विमान खरीद सौदे के मौके पर अमेरिका के बाइडेन, फ्रांस के मैक्रों और ब्रिटेन के ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री...
पहले जुगाड़, अब आगे मशीनी दिमाग तब भारत का भविष्य में बनना क्या है?

पहले जुगाड़, अब आगे मशीनी दिमाग तब भारत का भविष्य में बनना क्या है?

यों मसला वैश्विक है। मगर मेरी चिंता भारत है। वह भारत जो अब दुनिया की सर्वाधिक 140 करोड़ आबादी लिए हुए है। जहां दिमाग और बुद्धि का न्यूनतम उपयोग...
दुनिया का क्या है भारत नजरिया? विश्व में भारत पहचान क्या? क्या बन रही होगी भारत आइडेंटिटी?

दुनिया का क्या है भारत नजरिया? विश्व में भारत पहचान क्या? क्या बन रही होगी भारत आइडेंटिटी?

ये सवाल नरेंद्र मोदी और गौतम अदानी की वजह से आज प्रासंगिक है? भारत में जो हुआ है और जो होता हुआ है उस सबमें भारत को ले कर...
अदानी को बचाने या तो आज सरकार उढेलेगी पैसा या…..

अदानी को बचाने या तो आज सरकार उढेलेगी पैसा या…..

आज या तो मोदी सरकार अपने बैंकों तथा एलआईसी से अदानी ग्रुप के शेयरों की अंधाधुंध खरीद करवाएगी या बैंकों-एलआईसी की बरबादी रोकने के लिए उन्हें अदानी के शेयरों...
दिल्ली सत्ता है ही हिंदूओं की गुलामी के लिए!

दिल्ली सत्ता है ही हिंदूओं की गुलामी के लिए!

सत्ता के अनुभव का ऐसा इतिहास। तभी कौम को क्या यह सामूहिक संकल्प नहीं बनाना चाहिए कि कुछ भी हो जाए वे दिल्ली की सत्ता को सर्वशक्तिमान नहीं बनने...
ताकि हिंदू मूल (मूल ढांचा) गंवा एनिमल फार्म की भेड़-बकरी बने!

ताकि हिंदू मूल (मूल ढांचा) गंवा एनिमल फार्म की भेड़-बकरी बने!

इन दिनों भारत (हिंदुओं) को जानवरों का बाड़ा बनाने के कई प्रयास हैं! सर्वोपरि नंबर एक कोशिश मनुष्य दिमाग को ठूंठ बनाना है।
शरद यादवः मंडल के पितामह!

शरद यादवः मंडल के पितामह!

दिवगंत आत्मा को श्रद्धांजलि में यह ग्लानि दिल-दिमाग को छलनी कर दे रही है कि कैसे उनके सादे सहज-सरल परिवार को धैर्य बंधाऊं। कैसे शरदजी को याद करूं?
नया वर्षः वही जात, वही मंदिर!

नया वर्षः वही जात, वही मंदिर!

सन् 2023 का पहला सप्ताह। और सात दिनों की क्या सुर्खियां? बिहार में जाति जनगणना शुरू। दिल्ली के मेयर चुनाव में मारपीट, जन प्रतिनिधियों को खरीदती भाजपा। विदेशी विश्वविद्यालयों...