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31-03-2025 Vol 19

लेख स्तम्भ

फिर संसद का क्या मतलब?

फिर संसद का क्या मतलब?

संसद के मौजूदा सत्र में दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को लेकर विपक्ष में जो रोष नजर आ रहा है, उस पर गंभीरता से चर्चा किए जाने की जरूरत...
भरोसा क्यों डोल रहा है?

भरोसा क्यों डोल रहा है?

जिस देश से उसके अपने नागरिकों का भरोसा डोलने लगे, उसके भविष्य के बारे में चिंतित होने की ठोस वजह रहती है।
संदेह का निवारण जरूरी

संदेह का निवारण जरूरी

महाराष्ट्र के पत्रकार शशिकांत वारिशे की हत्या का मामला देर से चर्चित हुआ। लेकिन इस कांड से संबंधित जानकारियां सामने आने के बाद कई गंभीर शक पैदा हुए हैं।
विक्टिम कार्ड का सहारा

विक्टिम कार्ड का सहारा

उचित यह होता कि नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई बहस का जवाब देते समय उठाए गए सवालों के तथ्यपरक जवाब देश के सामने रखते। लेकिन उन्होंने अडानी...
नेपाल में भू-राजनीतिक होड़

नेपाल में भू-राजनीतिक होड़

यह बात नेपाल के टीकाकार भी कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आज उनके देश को जितना महत्त्व मिल रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ।
प्रत्यारोप जवाब नहीं होते

प्रत्यारोप जवाब नहीं होते

देश-दुनिया में बहुत सी बातें अनुभवजन्य होती हैं। उनके कोई लिखित सबूत नहीं होते, लेकिन इनसान उसमें इसलिए भरोसा करता है, क्योंकि उसके पास ऐसा करने के कारण होते...
फैसला तो लेना ही होगा

फैसला तो लेना ही होगा

भारत सरकार को 28 हजार करोड़ रुपये का भुगतान रूस को करना है। लेकिन रूस डॉलर में यह रकम लेने से मना चुका है।
रिश्तों का गुब्बारा फूटा

रिश्तों का गुब्बारा फूटा

जब रिश्तों को बनावटी ढंग से गुब्बारे की तरह उड़ाने की कोशिश की जाए, उनके कभी भी पंक्चर हो जाने की स्थिति बनी रहती है।
डंडे से समाज सुधार

डंडे से समाज सुधार

सरमा को खुद से पूछना चाहिए कि मध्य और समृद्ध वर्ग के परिवारों में बाल विवाह क्यों नहीं होते?
भारत और परवेज मुशर्रफ

भारत और परवेज मुशर्रफ

परवेज मुशर्रफ नहीं रहे। करीब नौ साल तक देश पर राज करने वाले जनरल मुशर्रफ का रविवार को दुबई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
बात अडानी तक नहीं

बात अडानी तक नहीं

बीते 24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च की तरफ अडानी ग्रुप के बारे में रिपोर्ट जारी करने से मची उथल-पुथल अब सिर्फ इसी उद्योग समूह का संकट नहीं रह गई...
सुधार का विकल्प नहीं

सुधार का विकल्प नहीं

इस वक्त एक ऐसी स्थिति हमारे सामने है, जब भारत के तीन पड़ोसी देश आर्थिक संकट में फंस चुके हैँ।
साहस कहें या दुस्साहस?

साहस कहें या दुस्साहस?

आप चाहें, तो इसे साहस या आत्म-विश्वास कह सकते हैं। किसी और नजरिए से इसे दुस्साहस या अति आत्म-विश्वास भी कहा जा सकता है।
बुलबुले हैं, तो फूटेंगे ही!

बुलबुले हैं, तो फूटेंगे ही!

हिंडनबर्ग रिसर्च ने गौतम अडानी को की कंपनी पर गंभीर आरोप लगा दिए। इससे विश्वास का संकट खड़ा हुआ और अडानी ग्रुप गहरे संकट में फंस गया है।
म्यांमारः दो साल बाद

म्यांमारः दो साल बाद

अब ऐसा लगता है कि दुनिया म्यांमार के लोगों को उनकी तकदीर के भरोसे छोड़ चुकी है।
आइडिया चाहिए, एकाउंटिंग नहीं

आइडिया चाहिए, एकाउंटिंग नहीं

आर्थिक सर्वे से अपेक्षा रहती है कि वह चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था का जो हाल रहा, में उसकी ठोस तस्वीर पेश की जाएगी।
पाकिस्तान में लौटा आतंकवाद

पाकिस्तान में लौटा आतंकवाद

पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद में हुए हमले में 60 से ज्यादा लोगों की मौत ने दशक भर पहले के उस दौर की याद ताजा करा दी है, जब...
सवाल संसद की गरिमा का

सवाल संसद की गरिमा का

अब संसद के हर सत्र की शुरुआत पर संसद की गरिमा का सवाल चर्चा में आता है। जाहिरा तौर पर इसकी वजह गुजरे वर्षों में संसद के अंदर दिखी...
प्रभावशाली शुरुआत के बाद

प्रभावशाली शुरुआत के बाद

राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा की समाप्ति के मौके पर कहा कि जो अभियान उन्होंने छेड़ा है, यह उसका अंत नहीं है।
विकास से उपजी समस्या

विकास से उपजी समस्या

इसके पहले हाल में यह खबर आई थी कि देश में पिछले साल बच्चों के जन्म लेने की संख्या में भारी गिरावट आई।
चीन के आगे लाचार?

चीन के आगे लाचार?

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 अब भारत के पास नहीं हैं।
पर्यावरण के प्रति लापरवाही

पर्यावरण के प्रति लापरवाही

हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में आए हजारों विदेशी पक्षी वहां से समय से पहले ही वापस अपने देश चले गए हैं।
प्रतिबंध तेरे रूप अनेक!

प्रतिबंध तेरे रूप अनेक!

सत्ता पक्ष को डॉक्यूमेंटरी से संबंधित अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
देसी दवाएः वाजिब सवाल

देसी दवाएः वाजिब सवाल

कोरोना वायरस के खिलाफ एक अभियान के रूप में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पारंपरिक चीनी चिकित्सा को बढ़ावा दिया है।
रोजगार पर गहरी मार

रोजगार पर गहरी मार

यह खबर सचमुच परेशान करने वाली है कि अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियों में जा रही नौकरियों का सबसे बड़ा शिकार वहां रहने वाले भारतीय हुए हैँ।
आर-पार की जंग?

आर-पार की जंग?

ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने जजों की नियुक्ति के मामले में न्यायपालिका की स्वायत्तता को लेकर आर-पार की जंग छेड़ रखी है।
तो कैसे होगा मुक्त व्यापार?

तो कैसे होगा मुक्त व्यापार?

बेडेनोच पिछले महीने भारत आई थीं और यहां मुक्त व्यापार समझौते को लेकर उनकी वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत हुई थी।
पाकिस्तान की बदहाली

पाकिस्तान की बदहाली

कपड़ा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के मुताबिक ये कारोबार बंद होने के कगार पर है। इस कारण हजारों की संख्या में कर्मचारी निकाले जा रहे हैं।
उठे सवाल जायज हैं

उठे सवाल जायज हैं

बीबीसी ने 2002 के गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि में नरेद्र मोदी के राजनीतिक जीवन पर अभी डॉक्यूमेंटरी क्यों बनाई, यह सवाल जायज है।
जलवायु परिवर्तन की मार

जलवायु परिवर्तन की मार

जलवायु परिवर्तन का असर अब दुनिया पर इतनी तेजी से दिखने लगा है कि ऐसी आपदाएं अब आम खबर जैसी हो गई हैं।
ये कैसा डेमोग्राफिक डिविडेंड?

ये कैसा डेमोग्राफिक डिविडेंड?

यह आम निष्कर्ष रहा कि आधे से ज्यादा बच्चे अपनी क्लास से दो क्लास नीचे के टेक्स्ट ठीक से नहीं पढ़ पाते।
सद्भावना का बुलबुला

सद्भावना का बुलबुला

अचानक यथार्थ से परिचित कोई नेता सद्भावना भरी बातें कह डालता है, लेकिन उसकी भावनाएं क्षणिक बुलबुला ही साबित होती हैं।
विज्ञान की बड़ी सफलता

विज्ञान की बड़ी सफलता

भारत में हर साल सैकड़ों लोग बिजली गिरने से मर जाते हैं। पिछले साल आई खबरों के मुताबिक इस कारण नौ सौ से अधिक मौतें हुईं।
कोई राह निकलेगी?

कोई राह निकलेगी?

स्विट्जरलैंड के दावोस में हर साल होने वाला 'वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम' एक महत्त्वपूर्ण आयोजन है, जिसकी चर्चाएं अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।
ये सीधा प्रहार है

ये सीधा प्रहार है

केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजुजू का कॉलेजियम में सरकार के प्रतिनिधि की भागीदारी के लिए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखना न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार माना जाएगा।
इसका उपाय क्या है?

इसका उपाय क्या है?

सवाल यह चर्चित रहा है कि जिस समय सीमा पर तनाव बढ़ता चला गया है, उस समय आखिर व्यापार संबंध और प्रगाढ़ होने को कैसे स्वीकार किया जा सकता...
अब प्रश्न औचित्य का

अब प्रश्न औचित्य का

नदी में पानी आता है, तो सबकी नाव ऊंची होती है- यह कहावत अक्सर नव-उदारवादी अर्थव्यवस्था के औचित्य को सही ठहराने के लिए कही जाती है।
ये कारगर उपाय है?

ये कारगर उपाय है?

भारत सरकार कश्मीर में हजारों ग्रामीणों को हथियारबंद करने की योजना पर फिर अमल कर रही है।
‘हाथ’ से जुड़ेंगे हाथ?

‘हाथ’ से जुड़ेंगे हाथ?

कांग्रेस के नजरिए से यह अच्छी बात है कि भारत जोड़ो यात्रा के साथ ही संगठन को सक्रिय रखने की योजना पार्टी नेतृत्व ने घोषित कर दी है।
जटिल समस्या, कठिन समाधान

जटिल समस्या, कठिन समाधान

उत्तराखंड में जोशीमठ के बाद खबर है कि कर्णप्रयाग में भी कई मकानों में दरार आ गई है।
भड़की भावनाओं का टकराव

भड़की भावनाओं का टकराव

जब किसी देश या समाज में ‘भावनाएं’ राजनीति और संस्कृति के केंद्र में आ जाती हैं, तो उसका क्या नतीजा होता है, इसकी एक ताजा मिसाल झारखंड में देखने...
चीन में कोरोना नियंत्रित?

चीन में कोरोना नियंत्रित?

निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि देश को फिर से खोलने से 17 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में फिर से जान आ सकती है
नेपाल से नई चुनौती

नेपाल से नई चुनौती

कम्युनिस्ट पार्टियों और कई अन्य दलों को एक मंच पर लाने के पीछे चीन की भी भूमिका रही है।
एक खतरा यह भी

एक खतरा यह भी

बेकार पानी को साफ करके पीने के पानी में बदलने वाले ट्रीटमेंट प्लांट एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पैदा करने का बड़ा ठिकाना बन रहे हैं। इसकी वजह पानी में एंटीबायोटिक...
एकरूपता थोपने की जिद

एकरूपता थोपने की जिद

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को जो हुआ, वह कतई अच्छा संकेत नहीं है। इस घटना से राज्यपालों की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आई है।
डिजिटल भारत की हकीकत

डिजिटल भारत की हकीकत

डिजिटल भारत का शोर हकीकत से दूर है। असल सूरत यह है कि भारत में इंटरनेट का प्रसार लगभग स्थिर हो गया है। और यह सूरत खुद सरकारी आंकड़ों...
लोकतंत्र का यह दौर!

लोकतंत्र का यह दौर!

यह लोकतंत्र का कैसा दौर है? समाजों में बढ़ते ध्रुवीकरण के साथ चुनाव नतीजों को सहजता से स्वीकार कर लेने का चलन कमजोर पड़ता जा रहा है।
चीन के दावे पर चिंता

चीन के दावे पर चिंता

अगर सचमुच चीन के शोधकर्ताओं ने दुनिया के किसी भी ऑनलाइन इन्क्रिप्शन (पासवर्ड) को भेदने की सक्षता हासिल कर ली है, उससे तमाम देशों का चिंतित होना लाजिमी है।