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नोटबंदी के नफे नुकासान पर वाक-युद्ध, जेटली ने कहा कर आधार बढ़ा, राहुल ने कहा 15 लाख हुए बेरोजगार

नई दिल्ली। सरकार और विपक्षी ने दल दो साल पहले हुई नोटबंदी के नफे नुकसान को लेकर बृहस्पतिवार को एक-दूसरे पर शब्दों के तीखे वाण चलाये। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने नोटबंदी का पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि इससे करदाताओं की संख्या में उछाल आया है वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इस कदम से 15 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और अर्थव्यवस्था को जीडीपी के एक प्रतिशत के बराबर चपत लगी।

चलन से 500 और 1,000 रुपये के नोट हटाने के दो साल पूरे होने के मौके पर सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ आक्रमक रुख अख्तियार करते हुए 10 सवाल पूछे। पार्टी ने पूछा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते भ्रष्टाचार और कालाधन को समाप्त करने के लिये क्या कदम उठाये।

भाजपा ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के नीतिगत मुद्दों पर बोलने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि वह स्वयं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को लेकर जांच एजेंसियों के घेरे में है। जेटली ने फेसबुक पर ‘नोटबंदी का प्रभाव’ शीर्षक से लिखे एक लेख में कहा कि देश में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 80 प्रतिशत उछलकर 6.86 करोड़ तक पहुंचना , डिजिटल लेन-देन में वृद्धि, गरीबों के हित के काम और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए संसाधन की अधिक उपलब्धता आठ नवंबर 2016 के नोटबंदी के कदम की मुख्य उपलब्धियां हैं।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण ही सरकार उन लोगों का पता लगा पायी जिनके पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति थी। नकदी जमा करने से संदिग्ध 17.42 लाख खाताधारकों का पता चला। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि मोदी सरकार का यह कदम खुद से पैदा की गई ‘त्रासदी’ और ‘आत्मघाती हमला’ था जिससे प्रधानमंत्री के ‘सूट-बूट वाले मित्रों’ ने अपने कालेधन को सफेद करने का काम किया।

गांधी ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत के इतिहास में आठ नवंबर की तारीख को हमेशा कलंक के तौर पर देखा जाएगा...प्रधानमंत्री की एक घोषणा से भारत की 86 फीसदी मुद्रा चलन से बाहर हो गई जिससे हमारी अर्थव्यवस्था थम गई। इससे 15 लाख लोगों को नौकरी गंवानी पड़ी और जीडीपी को एक प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था की ‘तबाही' वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है तथा इसके घाव गहरे होते जा रहे हैं।

नोटबंदी के पीछे तर्क पर सवाल उठाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्वयं से कुरेदा गया गहरा जख्म करार दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ मुट्ठी भर लोगों को लाभ पहुंचाने के लिये नोटबंदी का कदम उठाया गया है।

इससे आम लोग प्रभावित हुए। आलोचनाओं का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था मजबूत हुई और सरकार के पास गरीबों के हित में काम करने और बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए। बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन लोगों का क्या हुआ जो निराशा फैला रहे थे जो कह रहे थे कि भारत का जीडीपी कम-से-कम 2 प्रतिशत नीचे आएगा।

लगातार पाचवें साल भारत दुनिया में तीव्र आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाला देश बना हुआ है। यह जारी रहेगा। इससे साफ है कि निराशा का रुख रखने वाले पूरी तरह गलत साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से कर प्रणाली, डिजटलीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था को संगठित रूप देने में मदद मिली। निश्चित रूप से अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है और मुझे भरोसा है कि आने वाले वर्ष में इन कदमों से होने वाले लाभ से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि साथ माल एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू करने से कर चोरी दिन-ब-दिन मुश्किल होती जा रही है। जीएसटी के बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में अप्रत्यक्ष कर 5.4 प्रतिशत बढ़ा है जबकि 2014-15 में यह 4.4 प्रतिशत था। नोटबंदी के दौरान, लगभग पूरी नकदी के बैंकों में लौट आने की आलोचना पर जेटली ने कहा कि ऐसा कहने वालों की ‘जानकारी गलत’ है।

नोटबंदी का लक्ष्य मुद्रा की सरकार द्वारा नकदी को जब्त करना नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘ व्यापक अर्थों में नोटबंदी का लक्ष्य संगठित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना और करदाताओं की संख्या बढ़ाना था। देश को नकदी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाने के लिए व्यवस्था को हिलाने की जरूरत थी।

स्वाभाविक तौर पर इसका परिणाम उच्च कर राजस्व और उच्च कर आधार के रूप में दिखा है। उल्लेखनीय है कि आठ नवंबर 2016 को कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने 500 और 1000 रुपये के तत्कालीन नोटों को बंद कर दिया था।

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