कुभ मेला कई प्रसंगों में अत्यंत महत्वपूर्ण है: योगी

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने प्रयागराज में लग रहे कुम्भ मेले की चर्चा करते हुए कहा कि इस बार का कुभ कई प्रसंगों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्री नाईक ने शुक्रवार को यहां दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव के शुभारम्भ के बाद कहा कि कुम्भ मेला हजारों सालों से चल रहा है ,लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व अबकी बार हो रहा है वह कई प्रसंगों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि यह मेला इलाबाद में होता था और इसके पहले इलाहाबाद का पुराना नाम प्रयागराज था जो मुख्यमंत्री ने पुराना नाम प्रयागराज को पुर्नस्थापित किया है इसलिए यह कुम्भ मेला अबकी बार से प्रयागराज में होगा। कुभ मेला के संरक्षक श्री नाईक ने जनता का आह्वान करते हुए कहा कि यह मेरी ओर से विनम्र निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग कुम्भ में आयें और गंगा, यमुना एवं सरस्वती नदियों में स्नानकर पून्य अर्जित करें। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी से 15 मार्च तक लगने वाले इस कुंभ मेला में करोड़ो श्रद्धालुों के साथ साधू संत, विभिन्न अखाड़े और विदेशी आ रहे हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि गोरखपुर महोत्सव भारतीय संस्कृति सभ्यता और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संस्कृति जीवन की परम्परा है जिसका प्रचार-प्रसार एंव विकास करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से महोत्सव का आयोजन होता है जिससे हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति विकसित होती है।

श्री नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नित्य नये-नये विकास कार्य संचालित हो रहे है ,जो गोरखपुर महोत्सव में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की प्रसन्नता हो रही है कि यह महोत्सव पिछले साल आयोजित हुआ तथा इस बार और विस्तृत रूप में इसका आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि विद्धान एंव बुद्धिमान व्यक्ति वही होता है जो किसी कार्य की शुरूआत करके उसको निरन्तर जारी रखता है।

राज्यपाल ने कहा कि गोरखपुर महोत्सव बहुत अच्छे समय पर आयोजित किया गया है , क्योंकि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती है ,जिसके आदर्शों का हम सभी को अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने स्वामी जी के कृतित्व एंव व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ऐसी संस्कृति में विश्वास रखता है जिसमें सारी दुनिया एक परिवार के रूप में मानी जाती है। उन्होंने कहा कि 14 एंव 15 जनवरी को मकर संक्रान्ति का पर्व प्रारम्भ होगा तथा 15 जनवरी से कुम्भ प्रारम्भ हो रहा है अर्थात 11 जनवरी से 13 जनवरी तक आयोजित होने वाले गोरखपुर महोत्सव बड़े अच्छे समय एंव महूर्त में शुरू हुआ है।

श्री नाईक ने उत्सव एंव महोत्सव के अन्तर बताते हुए कहा कि संस्कृति का दर्शन महोत्सव में मिलता है। हमारे देश में कुल 64 कलाएं है, महोत्सव में 30 स्टाल किताबों के लगाये गये है, किताब जीवन का आनन्द और ज्ञान प्रदान करता है। संस्कृति जीवन की परम्परा है। उन्होंने गोरखपुर महोत्सव की सफलता की शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा कि यह महोत्सव से सभ्यता एंव संस्कृत मजबूत होगी तथा देश की एकता और अखण्डता को बल मिलेगा।

इस अवसर पर महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष मण्डलायुक्त अमित गुप्ता ने बताया कि गोरखपुर महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य यहां के साथ साथ पूर्वान्चल की संस्कृति एंव सभ्यता को प्रदर्शित करना है तथा विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नित्य नये नये विकास को दर्शाना है। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय गोरखपुर महोत्सव के साथ साथ 11 से 17 जनवरी तक शिल्प मेला आयोजित होगा जिसके माध्यम से शिल्पियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ज्ञानवर्धन के लिए पुस्तक मेला महोत्सव का आयोजन होगा।

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