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गैरसैंण विधानसभा भवन पर जुर्माना लगाने का निर्देश

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरणीय मंजूरी के बिना चमोली जिले के गैरसैंण में नए विधानसभा भवन का निर्माण शुरू करने के लिए उत्तराखंड सरकार पर पर्यावरण मुआवजा लगाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति रघुवेंद्र एस राठौड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह गौर करते हुए आदेश जारी किया कि पर्यावरण मंजूरी के बिना निर्माण कार्य इस आधार पर शुरू किया गया था कि यह 20 हजार वर्ग मीटर से कम है।

पीठ ने कहा कि यह निर्माण अब 20 हजार वर्ग मीटर से बढ़कर 25 हजार वर्ग मीटर का हो गया है। पीठ ने राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) से कहा कि वह भवन के निर्माण के संबंध में प्रस्ताव पर पर्यावरण कानून के उल्लंघन के तौर पर विचार करे। पीठ ने कहा कि एसईएसी शर्तें तय करेगी और प्रतिवादियों को उसे अक्षरश: पूरा करना होगा। पीठ ने यह भी कहा कि पर्यावरण कानूनों के आलोक में पूरे मामले पर विचार करने के बाद एसईएसी को अगर लगता है तो वह पर्यावरण मुआवजा लगाने के लिए स्वतंत्र होगी।

एनजीटी ने निर्देश दिया कि लगाए जाने वाले मुआवजे को आदेश जारी होने के दो महीने के अंदर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा करना होगा। पीठ ने एसईएसी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में तत्काल विचार शुरू करे और एक महीने के अंदर कार्यवाही पूरी करे। अधिकरण ने पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इमारत के निर्माण में पर्यावरण कानून का उल्लंघन किया गया है।

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