Loading... Please wait...

श्रुति व्यास All Article

मी टू से निकलते कई सवाल

यौन उत्पीड़न के खिलाफ मी टू अभियान जोर पकड़ चुका है। पिछले साल अमेरिका से शुरू हुए इस अभियान ने आज भारत में कई नामी-गिरामी लोगों को अपनी जद में ले लिया है। और पढ़ें....

विदेश नीति: मोदी के जरिए क्या कुछ?

किसी भी देश की विदेश नीति उसके नेताओं के विश्वास और माहौल के दबाव का मिलाजुला प्रतिबिंब होती है। लेकिन दुर्भाग्य से भारत की स्थिति हमेशा से ऐसी रही है कि जब दुनिया से रिश्ते बनाने की बात आती है तो हम कहीं न कहीं बचाव की मुद्रा में ही और पढ़ें....

खेल में लिंग व नस्ल का भला क्या मतलब?

दोनों के ही लिए खिताबी मैच एक सपने जैसा था। जापान की बीस वर्षीय नाओमी ओसाका पहली बार सेरेना के सामने ग्रैंड स्लैम खेल रही थीं। जबकि एक साल की बेटी  की मां सेरेना विलियम्स के लिए चौबीसवां सिंगल मुकाबला था। और पढ़ें....

सन्नाटे में शांति है तो अशांति भी !

मैं क्या करूं? किससे कश्मीर को जानू? अहसास बता रहा है कि कश्मीर जो है उसे खुद कश्मीरी भी नहीं जानते-समझते है कि यह है क्या? सब ठहरा, ठिठका और निठल्ला है तो कोई-क्या अर्थ निकालेगा? कोई कहता है यह विवादित इलाका है। और पढ़ें....

आजादी के दिन भीख और हुड़दंग

पंद्रह अगस्त के दिन दिल्ली की खाली पड़ी सड़कों पर अगर निकल जाएं तो एक अजीब-सा अहसास होता है और यह अहसास है आजादी के खालीपन, खोखलेपन का। खाली और खोखली आजादी। और पढ़ें....

एक चुनौती का नाम है इंद्रा नूई

साल 2002 में जब इंद्रा नूई ने दुनिया की विशालकाय कंपनी पेप्सी की कमान संभाली थी, तो एक तरह से वह क्रांति की आहट थी। दुनिया में महिलाओं के लिए एक बड़ा दरवाजा खुला था। और पढ़ें....

अवैध नहीं हैं ये चालीस लाख लोग

हम सब चौंके हुए, हैरान और किंकर्त्वयमूढ़ हैं। भारत राष्ट्र-राज्य के आगे संकट विकराल आ खड़ा होना है। क्या हम 40 लाख लोगों को अवैध मान उन्हे बंदीगृहों, डिटेंशन सेंटर के बाड़ों में रखेंगें? और पढ़ें....

मोदी, राहुल की टूटती, बदलती छवियां!

वक्त बदलता है छवियों को और व्यक्तित्व को। समय के साथ इमेज, धारणाएं लेती है नए आकार तो व्यक्तित्व होता है नए सिरे से परिभाषित। संदेह नहीं है कि आज की राजनीति में कुछ बुनियादी अवधारणाएं ज्यादा महत्व वाली और आत्मचिंतन का विषय हैं। और पढ़ें....

पढ़ाई के बाद सचमुच छूटता पढ़ना!

शाम का वक्त और लोगों का आता-जाता रैला! खाने-पीने की तमाम दुकानों में लोग। किराने की दुकानों में रोजाना के खरीदारों की रेलमपेल तो फूल-गुलदस्ते वाले भी फुर्ती से काम में लगे हुए। और पढ़ें....

आस्था, धर्म और मोक्ष के बीच!

सुबह के साढ़े पांच बजे और बनारस का अस्सी घाट! सूरज निकलने की तैयारी में। हवा में ठहराव सा और गंगा के बने मैदान की बैचेनी, सन्नाटा लिए हुए। नमी वाली गर्म हवा शरीर पर मानों सूइयां चुभोती हुई। और पढ़ें....

← Previous 123
(Displaying 1-10 of 28)
श्रुति व्यास

श्रुति व्यास

editor6@nayaindia.com

Shruti Vyas is the Editor(views) of NAYA INDIA and has over 3 years of experience as a writer on international affairs and on social issues. She started his journalistic career as a roving correspondent at Jain studio in 2009. She joined as director to Samvad Parikrama in 2010 and then joined NAYA INDIA. She is incharge of the opinion page as well as in charge of planning features and stories for Saturday-Sunday special feature pages. she helps oversee NAYA INDIA’s editorial content and writes on contemporary issues.

© 2018 ANF Foundation
Maintained by Quantumsoftech