शशांक राय All Article

इस बार का चुनाव ऐतिहासिक

भारत में चुनाव को आम लोग रूटीन की तरह लेते हैं। देश में इतने चुनाव होते रहते हैं कि लोगों को इस बारे में अन्यथा विचार करने की जरूरत नहीं पड़ती है। और पढ़ें....

युद्ध, आतंक और पाकिस्तान का एजेंडा

अगले लोकसभा चुनाव का एजेंडा तय हो गया है। आमतौर पर सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को एजेंडा बना कर चुनाव लड़ता है और विपक्ष उसकी विफलताओं को मुद्दा बनाता है। और पढ़ें....

बयानों से आतंकवाद नहीं रूकेगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कह रहे हैं कि भारत सरकार कार्रवाई के योग्य खुफिया सबूत दे तो पाकिस्तान आतंकवादियों पर कार्रवाई के लिए तैयार है। और पढ़ें....

महागठबंधन बनाम महागठबंधन का मुकाबला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्षी पार्टियों के गठबंधन बनाने के प्रयास को महामिलावट का नाम दे रहे हैं। वे अपनी सभाओं में कहते हैं कि पिछले 30 साल से मिलावट की सरकार चलती थी और अब महामिलावट की सरकार बनाने का प्रयास हो रहा है। और पढ़ें....

असहिष्णुता के विस्तार की चिंता

दो बिल्कुल अलग अलग छोर की घटनाओं ने एक बार फिर असहिष्णुता बढ़ने या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कम किए जाने की बहस को केंद्र में ला दिया है। दोनों छोर की दो-दो घटनाओं की मिसाल दी जा सकती है। और पढ़ें....

बोफोर्स बनता राफेल का विवाद!

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे राफेल सौदे को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं और विपक्षी पार्टियों खास कर कांग्रेस की तल्खी बढ़ती जा रही है। और पढ़ें....

एजेंसियों की साख क्या बची?

यह महज संयोग है या नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कामकाज की शैली ही ऐसी है कि उनके राज में पुलिस अधिकारियों और एजेंसियों की लड़ाई चलती रहती है? और पढ़ें....

अगले सत्र को लेकर अटकलें

संसद का अगला सत्र 31 जनवरी से शुरू होने वाला है। यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल का आखिरी सत्र है। अगर पिछले सत्र को आधार मानें तो यह तय मानना चाहिए कि यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ेगा। और पढ़ें....

महागठबंधन से इतनी परेशानी क्यों?

अभी विपक्षी पार्टियों का गठबंधन बना नहीं है। उसकी कोई रूपरेखा नहीं उभरी है और उनके आपस के इतने अंतर्विरोध हैं कि साथ आने पर भी उनके बीच खींचतान जारी रहने वाली है। और पढ़ें....

मोदी बनाम अन्य की लड़ाई कहां?

अगले लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और खुद प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी बहुत चतुराई से अपना एजेंडा सेट कर रहे हैं। जिस तरह सातवें दशक में इंदिरा गांधी ने सारी लड़ाई का फोकस अपने ऊपर बनवाया था और पढ़ें....

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