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शंकर शरण All Article

बी. बी. कुमार पर यह बौद्धिक दुराग्रह

हाल में डॉ. बी. बी. कुमार को भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद (आई.सी.एस.एस.आर.) का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. कुमार पूर्वोत्तर भारत के मामलों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दो दशक से भी अधिक समय नागालैंड में कॉलेज अध्यापन किया है। पूर्वोत्तर भारत की चालीस भाषाओं के हिन्दी-अंग्रेजी कोश प्रकाशित किए हैं। और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-2ः धर्म की आलोचना

अभी तसलीमा नसरीन ने कहा कि “जब गैर-मुस्लिम अपने धर्म की आलोचना करते हैं तो उन्हें बुद्धिजीवी कहा जाता है। जब मुस्लिम अपने धर्म की आलोचना करते हैं तो उन्हें इस्लाम का दुश्मन, यहूदी, रॉ का एजेंट सहित जाने क्या-क्या कहा जाता है।” क्या इस पर मुसलमानों को सोचना नहीं चाहिए? और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-1 - स्त्रियों का संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक व हलाला की वैधानिकता पर सुनवाई शुरू कर दी है। कुछ इस्लामी नेता इस बहाने मुसलमानों को हिन्दू राष्ट्र के भूत से बरगला रहे हैं। जबकि तीन तलाक जैसे रिवाज के रहने या जाने से हिन्दू हितों का कोई लेना-देना नहीं है। ये रिवाज केवल और पढ़ें....

हिंदू-मुस्लिम फर्क पर टैगोर

पिछले बीस वर्षों में भारतीय राजनीति में कुछ परिवर्तन आया है। उस से कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक सीख का स्मरण होता है। टैगोर राजनीति से दूर थे, इसीलिए ऐसी सच्चाइयों को व्यक्त करने में समर्थ थे जो राजनीतिज्ञ नहीं करते। 1920-21 के खलीफत आंदोलन के समय महात्मा गाँधी ने एक और पढ़ें....

बात-चीत से अयोध्या समाधान?

1990 की गर्मियों की घटना है। दिल्ली के हिमाचल भवन में दो पुस्तकों का विमोचन थाः ‘रामजन्म-भूमि वर्सेस बाबरी मस्जिदः ए केस स्टडी ऑफ हिन्दू-मुस्लिम कन्फ्लिक्ट’ (कोएनराड एल्स्ट) तथा ‘हिन्दू टेम्पल्सः ह्वाट हैपेन्ड टु देम’(सीताराम गोयल)। इस विषय पर हिन्दू पक्ष की यह पहली व्यवस्थित प्रस्तुति थी। तब तक मार्क्सवादी और पढ़ें....

जिम्मीवाद से रुका अयोध्या समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने फिर अयोध्या मामले को टाल दिया। उस ने जो कहा, उस के लिए छः साल बैठे रहने की क्या जरूरत थी? सुब्रह्मण्यम स्वामी को टका सा जबाव देते कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि उसे इस की सुनवाई करने का समय नहीं है। अजीब यह कि और पढ़ें....

मसीहा का क्या इलाज!

मुसलमानों का हाल सैयद शहाबुद्दीन ने यह लिखा था, ‘इस्लामी दुनिया राजनीतिक रूप से अस्थिर, सैन्य रूप से रीढ़-विहीन, आर्थिक रूप से ठहरी, तकनीकी रूप से बाबा आदम जमाने की, सामाजिक रूप से अंधविश्वासी और पतनशील है। विद्वता में मुसलमान शायद ही कहीं दिखते हैं और विज्ञान में तो वे और पढ़ें....

राम नाम की औषधि

भारत में ‘राम धुन’ आयोजन लोकप्रिय है। नाम-जप और मंत्र-जाप यहाँ की प्राचीन ज्ञान पंरपरा का अंग है। डाकू रत्नाकर का ‘मरा-मरा’ से ‘राम-राम’ कहते हुए महान ऋषि में बदल जाने की कथा कोई पौराणिक कल्पना नहीं। उस का मर्म ही राम नाम की महिमा है, जिसे कोई जिज्ञासु आज और पढ़ें....

विकास और हिन्दू चिन्ता

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही दो बड़े अंग्रेजी संपादकों ने उन से जो पहला सवाल पूछा, वह था ‘आप पहले हिन्दू हैं या भारतीय?’। अन्य सवाल भी ऐसे ही थेः राष्ट्रवाद प्रमुख है या विकास? क्या हिन्दू हुए बिना भारतीय हुआ जा सकता है? आदि। ऐसे प्रश्न स्वतंत्र भारत में और पढ़ें....

इस्लामियत या इन्सानियत?

असमी गायिका नाहिद आफरीन के खिलाफ 46 मुस्लिम संगठनों, मौलवियों ने फतवा दिया है। उन के शब्द विचारणीय हैं, ‘‘नृत्य, नाटक, थियेटर, आदि शरीयत कानून के खिलाफ हैं। संगीत भी शरीयत के खिलाफ है। इस से नई पीढ़ी भ्रष्ट हो जाएगी।’’ यानी, इस्लामी नजरिए से संगीत, नाटक, नृत्य, पेंटिंग, आदि और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

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