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शंकर शरण All Article

गांधीजी का नाम कब तक भुनेगा?

गांधीजी ने अपने बच्चों को सोच-समझ कर आधुनिक, पश्चिमी शिक्षा-पद्धति में नहीं डाला था। किंतु एकाध अपवाद छोड़ दें तो आज उन के अधिकांश वंशज पश्चिमी रंग में रंगे हुए हैं। उन में से कोई भी महात्मा गाँधी की अपेक्षाओं या आदर्शों पर नहीं चला।  और पढ़ें....

ताकत का तर्क, न पाले मुगालता!

आजम खान द्वारा भारतीय सेना की खिल्ली उड़ाना, ओवैसी द्वारा सरकार को चेतावनी देना, या फारुख अब्दुल्ला द्वारा मजाक उड़ाना – यह सब पिछले सौ साल से चल रही मुस्लिम राजनीति के क्रम में ही है। और पढ़ें....

नए रहनुमा की जरूरत

अभी मजलिसे इत्तेहाद मुसलमीन के नेता ओवैसी जूनियर ने हिन्दू जनता और भारत सरकार का मजाक उड़ाया। समाजवादी नेता आजम खान ने भी हमारी सेना पर घृणित टिप्पणी की। इन्होंने पहले भी मंत्री पद से संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखा था कि यहाँ मुस्लिमों पर जुल्म हो रहा है। और पढ़ें....

चीन से आंख मिला तिब्बत पर बोले

चीन के साथ हमें अपनी ग्रंथि दूर करनी चाहिए। यह उस के साथ संबंध सुधार की पहली कुंजी है। इसी अर्थ में चीन की धमकियों और तीखे बयानों को अवसर बनाना चाहिए। और पढ़ें....

चीन से बराबरी के व्यवहार का वक्त

पहले अरुणाचल, फिर असम में पुल उदघाटन और अब सिक्किम सीमा पर चीन ने भारत को चेतावनी दी है। एक अर्थ में यह स्वागत योग्य है। क्योंकि यह अवसर है कि भारत चीन के प्रति अपनी हीन-भावना से मुक्त हो सके। और पढ़ें....

अरूण शौरी का मोर्चा

कहते हैं राजा को किसी ब्राह्मण का अपमान नहीं करना चाहिए। एक बार जब पाटलिपुत्र के शासक घनानन्द ने विद्वान विष्णुगुप्त का अपमान किया तो विष्णुगुप्त ने घनानंद को सत्ता से हटाने का प्रण कर लिया। और पढ़ें....

न्यायालय में कुरान

इधर आस्ट्रिया की संसद ने अपने देश में कुरान का वितरण प्रतिबंधित कर दिया है। स्विट्जरलैंड में भी इस पर विचार हो रहा है। चीन में बच्चों के नाम कुरान, इस्लाम, जिहाद, आदि रखने पर पाबंदी है। निस्संदेह, इस देशों की सतर्कता का कोई उचित कारण होगा। इस के विपरीत यहाँ और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-4ः मशाल खान की हत्या

पाकिस्तान के अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय, मरदान में पत्रकारिता के एक छात्र मशाल खान को अन्य छात्रों ने इसलिए मार डाला, क्योंकि उस पर ‘सेक्यूलर’ और ‘लिबरल’ होने का संदेह था। क्योंकि वह शुक्रवार को मस्जिद जाकर नमाज नहीं पढ़ता था। बस, इस संदेह और अपराध में दर्जनों मुस्लिम छात्रों और पढ़ें....

सच्चे सपूत की देश में जीरो कद्र!

दिल्ली में 9 सितंबर 2006 को एक पुस्तक विमोचन में मैंने पहली बार कँवरपाल सिंह गिल को सुना था। कार्यक्रम रोचक होना था, क्योंकि पुस्तक, उस के विमोचक और कार्यक्रम के अध्यक्ष तीनों के प्रति तब आम बौद्धिक आकर्षण था। पुस्तक थी कृष्ण काक और राधा राजन की ‘एनजीओज, एक्टिविस्ट्स और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-3- आदर्श क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब हैं?

अभी-अभी पाकिस्तान से छुड़ा कर लाई गई युवती उज्मा अहमद ने भारत पहुँचते ही यहाँ की मिट्टी को माथे से लगाया और कहा कि पाकिस्तान ‘मौत का कुँआ’ है। यह वही पाकिस्तान है, जिसे यहाँ के इस्लामी विद्वान अपना आदर्श बताते थे। कहते थे कि यहाँ के मुसलमान पाकिस्तान की और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

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