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शंकर शरण All Article

सोचें, अरुण शौरी की चिन्ता में क्या गलत?

अरुण शौरी की बातें अब बहुतेरे राष्ट्रवादियों, हिन्दूवादियों को पसंद नहीं आ रही। कारण दलीय पक्षधरता और राष्ट्रीय हितों का घाल-मेल हो जाना है। अन्यथा, भारतीय दर्शन तो ‘निन्दक नियरे राखिए ...’ को हितकारी बताता है। और पढ़ें....

सोचे जरा सांस्कृतिक गरीबी पर

ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी के अनुसार पूरी दुनिया में हिंसा, आतंक और हत्याओं की 84 प्रतिशत घटनाएं मुस्लिम समाजों में हो रही है। उन्होंने नोट किया कि आज दुनिया में इस्लाम हत्या, हिंसा, कोड़े, अपहरण-फिरौती और अन्याय का प्रतीक बन गया है। और पढ़ें....

गंगा की चिन्ता कैसे और क्या अर्थ ?

नेता लोग चुनाव जीतने के लिए कटिबद्धता से हर उपाय करते हैं। उसी तरह अफसर पोस्टिंग या तरक्की के लिए हर बाधा दूर करने का मार्ग खोजते हैं। अधिक से अधिक टैक्स वसूलने, खजाना बढ़ाने के लिए सरकार एक से एक तरीके निकालती है। और पढ़ें....

टैगोर नहीं, तैमूर

हाल में फिल्म एक्टर सैफ अली खान के बेटे तैमूर की पहली सालगिरह थी। कई हस्तियो ने ‘तैमूर’ को बधाई दी। जब यह नामकरण हुआ था, तो भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश में चर्चित हुआ। और पढ़ें....

गालिब, श्रद्धानन्द, हनुमान प्रसाद पोद्दार...

गालिब ने लिखा था: गालिबे-खस्ता के बगैर कौन से काम बन्द हैं ; रोइए जार-जार क्यों... ! उन्होंने इसे प्रश्न रूप में नहीं, किंचित दार्शनिक, स्थिति-स्वीकार भाव से लिखा था। और पढ़ें....

जाहीलिया कहां है?

पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जेनरल बाजवा ने अभी कहा है कि पाकिस्तान के लोगों को मदरसों की शिक्षा से बाहर निकलना और आगे देखना चाहिए। वरना उन का कोई भविष्य नहीं है। बाजवा के अनुसार, अधिकांश मदरसों में जो सीख दी जाती है और पढ़ें....

मंदिर-मुखी राहुल गांधी पर आपत्ति क्यों!

चूंकि गुजरात चुनाव के वोट पड़ चुके, अतः राहुल गाँधी के मंदिर जाने पर दलीय हितों से हटकर बात करनी चाहिए। क्योंकि मूल उद्देश्य देश-हित है। जब कांग्रेस से दल-बदल कर भाजपा में आने वाले का स्वागत होता है और पढ़ें....

कश्मीरी नेताओं की सीनाजोरी

हाल में ‘आज तक’ समाचार चैनल के एजेंडा कार्यक्रम में पत्रकार प्रसून वाजपेई (प) की नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला (फ) के साथ लाइव वार्ता में एक अंश यह था और पढ़ें....

गाँधी के विचार गैर-हिन्दू थे

भारत के हिन्दूवादियों द्वारा महात्मा गाँधी की जयकार में एक भारी विडंबना है। विदेशी अतिथियों को गाँधी-समाधि पर ले जाने जैसे नियमित अनुष्ठानों से यह और गहरी होती है। ऐसा कर के हमारे नेता क्या संदेश देते हैं? और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

bauraha@gmail.com

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