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शंकर शरण All Article

बोल कुबोल का मोल

बोली कितनी मूल्यवान है, यह इस से भी देख सकते हैं कि कोई नया व्यक्ति केवल सटीक, संयमित बोल सकने के कारण किसी महत्वपूर्ण पार्टी का वक्ता या प्रवक्ता हो जाता है। और पढ़ें....

समझदार हिंदू जाए तो कहां जाए?

भारत में सचेत हिन्दू आज भी बहुत कम हैं। अर्थात जिन्हें देश-दुनिया की ठोस जानकारी के साथ हिन्दुओं की तुलनात्मक स्थिति मालूम है। तदनुरूप जो अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश करते हैं। और पढ़ें....

कार्ल मार्क्स के 200 साल

5 मई 2018 को कार्ल मार्क्स के जन्म के दो सौ साल पूरे हुए, तो कहीं कोई चर्चा नहीं है। जबकि पचास साल पहले डेढ़ सौ वीं जयंती एक अंतर्राष्ट्रीय धूम थी! इस बीच क्या बदल गया? और पढ़ें....

काशी, मथुरा कब तक अपमानित रहेंगे?

छवि बिगाड़ने वाली किसी बड़े नेता के बेटे की खबर एक दिन में नियंत्रित हो जाती है। पर हिन्दू धर्म-समाज पर कीचड़ उछालने वाली अफवाह मजे से हफ्तों चलती रहती है। और पढ़ें....

हिंदू राजनीतिः धोखा या नौसिखियापन?

शिव सेना या तेलुगु देशम, आदि भाजपा पर ‘धोखे’ का आरोप लगा रहे हैं। जबकि कांग्रेस ने ‘ड्रामेबाजी’ का आरोप लगाया है। कुछ लोगों के अनुसार अगले चुनाव में भाजपा के विरुद्ध मुख्य नारा होगा ‘धोखा’। और पढ़ें....

2003 व 2018 की भाजपाः समानता व फर्क

पिछली बार केंद्र की राजग सरकार के अंतिम वर्ष में भाजपा समर्थक बौद्धिकों में दो समूह आपस में वाद-विवाद कर रहे थे। कुछ लोग निराश थे कि राष्ट्रीय, हिन्दू हित संबंधी जो आशाएं की गई थीं, वे पूरी न हुईं। और पढ़ें....

सब गाँधी क्यों बनना चाहते हैं?

वरिष्ठ पत्रकार दीनानाथ मिश्र कहते थे कि बड़े-बड़े हिन्दू राष्ट्रवादियों को पता नहीं कि इस्लाम क्या है? मगर वे ‘सभी धर्म समान हैं’, धर्म-ग्रंथ कहलाती सभी किताबों में एक ही बात है, आदि दुहराते रहते हैं। और पढ़ें....

पतन बाद तो सोचो वामपंथियों!

त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की हार एक अर्थ में वक्त की मार है। बंगाल और केरल में माकपा के माथे बड़े-बड़े पाप हैं, जो त्रिपुरा में नगण्य था। और पढ़ें....

सऊदी हवा में बदलाव

जिन्होंने प्रसिद्ध फिल्म ‘साउंड ऑफ म्यूजिक’ (1965) देखी हो, वे जूली एन्ड्रयूज की भूमिका भूल नहीं सकते। बंद कान्वेंट में रहने वाली युवा नन को संयोगवश एक परिवार के बच्चों के साथ रहने का अवसर मिलता है। और पढ़ें....

गाय और राजनीति

अभी जब डॉ. सुब्रहमण्यम स्वामी ने देश में गोहत्या बन्द कराने के लिए कानून बनाने का प्रस्ताव संसद में रखा, तो दिल्ली के एक बड़े अंग्रेजी अखबार ने कार्टून छापा। उस में मजाक था कि ‘हार्वर्ड विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित डॉ. स्वामी ने गोरक्षा का बिल विचार के लिए और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

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