अशोक प्रवृद्ध All Article

हिन्दू को संतुष्ट करने की चुनौती

2014 के चुनावों को लेकर भाजपा में भ्रम बना हुआ है कि वह विकास के एजेंडे की जीत थी, या हिंदुत्व के उभार की जीत थी । समाज के एक वर्ग का कहना है गुजरात के विकास माडल के कारण देश ने मोदी को विकास पुरुष के रूप में देखा और पढ़ें....

वेदांत के आध्यात्मिक गुरु विवेकानन्द

आज से 154 वर्ष पूर्व 12 जनवरी 1863 को हमारे देश में एक ऐसे सन्यासी ने जन्म लिया था, जिसने सम्पूर्ण विश्व को गौरवमयी भारत के प्राचीन ज्ञान की प्रकाश से जगमग कर दिया था। और पढ़ें....

सबके लिए हितकारी है योग

विश्व के सभी धर्म सत्य, अहिंसा, भातृभाव, सदाचार की शिक्षा देते हैं ताकि मनुष्य का जीवन उत्कृष्ट बन सके और वे अन्ततः उस परमशक्ति से जुड़ सकें। और पढ़ें....

वेद है ईश्वरकृत आदिज्ञान के भंडार

वेद शब्द का अर्थ ज्ञान है। आदि ज्ञान के भंडार चार वेद ग्रन्थ हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वेद के पदों को मन्त्र कहते हैं। ब्रह्म की विद्या ब्रह्म अर्थात वेद ही है। और पढ़ें....

होलीः असत्य पर सत्य की विजय

भारत के प्रमुख त्यौहार होली का सम्बन्ध वैदिक मतानुसार नवान्नेष्टि यज्ञ से माना जाता है , जिसमें  यज्ञ रूप में नवीन अन्न की बालियाँ भूनी जाती है और पढ़ें....

सुख- समृ्द्धिदायी सीता जयंती

भारतीय सांस्कृतिक जीवन में मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम को जो महत्व प्राप्त है, वही स्थान उनकी अर्द्धांगिनी सीता माता को भी प्राप्त है तथा जिस प्रकार समाज में रामनवमी का महात्म्य है, उसी प्रकार जानकी नवमी या सीता नवमी का भी महात्म्य माना जाता है । और पढ़ें....

छठे सिख गुरु ने दिलाया योद्धा चरित्र

धर्म की रक्षा करने और धर्म को संसार में सर्वोच्च स्थान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित सिख धर्म के दस गुरुओं में से एक गुरु हरगोविंद सिंह सिखों के पांचवें गुरु अर्जुनदेव सिंह के पुत्र थे, जिन्होंने सिखों को अस्त्र-शस्त्र का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया और सिख और पढ़ें....

गंगा दशहरा है गंगावतरण का दिन

भारतवर्ष के पौराणिक राजवंशों में सबसे प्रसिद्ध राजवंश इक्ष्वारकु कुल है। इस कुल की अट्ठाईसवीं पीढ़ी में राजा हरिश्चन्द्र हुए, जिन्होंने सत्यज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया। इसी कुल की छत्ती सवीं पीढ़ी में अयोध्या में सगर नामक महाप्रतापी , दयालु, धर्मात्माश और प्रजा हितैषी राजा हुए। और पढ़ें....

सिखों के पंचम गुरु गुरु अर्जुन देव

गुरू अर्जुन देव सिखों के पंचम गुरू थे, जिन्हें आध्यात्मिक जगत में गुरु के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। अपने धर्म के प्रति निष्ठां और धर्मनिरपेक्षता के लिए अपनी प्राण की आहुति देने वाले अर्जुन देव जी का जन्म गोइंदवाल साहिब में 18 वैशाख 7 विक्रम संवत तदनुसार 15 और पढ़ें....

गंगोत्पत्ति का दिन है गंगा सप्तमी

मानवीय चेतना को सतत प्रवाहित करने वाली नदी गंगा निरन्तरता, गतिशीलता और श्रम का प्रतीक है। यह अनवरत श्रमशीला बनी रहकर सभी को अथक, अविरल श्रम करने का संदेश देती है। इसीलिए गंगा को जीवन तत्त्व और जीवन प्रदायिनी कहा गया है और माता मानकर देवी के समान भारतीय समाज और पढ़ें....

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